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Delhi Corruption Case : एसआईटी गठित, एसीबी के रडार पर बीईएल के अधिकारी और ठेकेदार; पूछताछ की तैयारी
Thu, 20 Mar 2025 07:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 20 Mar 2025 07:08 AM IST
सार
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आप के कार्यकाल में सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार की साजिश भी रची गई।
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सत्येंद्र जैन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आप के कार्यकाल में सभी जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार की साजिश भी रची गई।
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अब सत्येंद्र जैन पर केस दर्ज होने के बाद एसीबी की ओर से जांच के लिए डीसीपी श्वेता सिंह चौहान के नेतृत्व व एसीपी जरनैल सिंह, दो इंस्पेक्टरों सहित अन्य पुलिसकर्मियों की एसआईटी गठित की गई है। भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के अधिकारी और ठेकेदार एसीबी के रडार पर हैं। इनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
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सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए पांच ठेकेदारों को ही काम दिलवाया गया। यहां तक अतिरिक्त कैमरे लगवाने का काम भी इन्हीं ठेकेदारों को दिया गया। ऐसे में ठेकेदारों ने सीसीटीवी लगाने में घटिया उपकरण का इस्तेमाल भी किया। इन ठेकेदारों को ही बीईएल से सीसीटीवी कैमरों की नई खेप का ऑर्डर दिलवाया गया और ऑर्डर वैल्यू को जानबूझकर बढ़ा दिया गया।
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अधिकारियों का कहना है कि परियोजना 571 करोड़ की थी। घोटाले के संबंध में मिली शिकायत में सात करोड़ रिश्वत की बात है, लेकिन यह घाेटाला कई करोड़ रुपये से जुड़ा हुआ है। रिश्वत की राशि जिन ठेकेदारों के माध्यम से दी गई, उन्हें 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरों का अतिरिक्त ऑर्डर भी दिया गया था। जब पीडब्ल्यूडी की ओर से परियोजना को हाथ में लिया गया तो कई सीसीटीवी कैमरे खराब थे।
एसीबी के सूत्रों ने बताया कि मामले में दिल्ली सरकार के पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री, पीडब्ल्यूडी और बीईएल के अधिकारियों की भूमिका व दोष निर्धारित करने की जांच के लिए डीसीपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।