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Expert View: दिलचस्प रहा है दिल्ली का सत्ता-संग्राम, कांग्रेस-भाजपा की भिड़ंत में अहम रहा मत-प्रतिशत
Fri, 15 Mar 2024 07:49 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 15 Mar 2024 07:49 AM IST
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प्रो. हेना सिंह, मिरांड हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव को लेकर देश में चुनावी माहौल चरम पर है। राजनीतिक दलों में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इस बीच प्रो. हेना सिंह, मिरांड हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि भाजपा का दिल्ली में सियासी सफर दिलचस्प है। अमूमन मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है। वर्ष 1984 से 2019 तक के बीच दिल्ली की सभी सीटों पर भाजपा व कांग्रेस ने 42 फीसदी व 44 फीसदी मत हासिल किए।
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कांग्रेस को भाजपा से दो फीसदी ज्यादा वोट मिले। जबकि सीटें भाजपा के खाते में ज्यादा आईं। दस चुनावों में दिल्ली की कुल 70 सीटों पर चुनाव हुए। भाजपा और कांग्रेस के बीच अगर इनका बंटवारा किया जाए तो इनमें से सिर्फ 26 पर कांग्रेस को जीत मिली। इसके उलट वोट प्रतिशत कम होने के बाद भी भाजपा 43 सीटें जीतने में कामयाब रही। इसकी बड़ी वजह संसदीय लोकतंत्र की वह प्रकृति है, जिसमें सीट और मत पाने का अनुपात कई बार एक सा नहीं होता है। दिल्ली के दस चुनावों के लिए भी यह बात सटीक बैठती हैं।
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बीते दस चुनावों में से 1989 व 1991 में जनता दल को भी 16.3 और 14.2 प्रतिशत मत मिले थे। 1989 में जनता दल ने बाहरी दिल्ली सीट भी जीती थी, लेकिन इनमें मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच रहा। वहीं, 2014 व 2019 में आप को 33.1 फीसदी व 18.1 फीसदी वोट मिले थे, जबकि दोनों चुनावों में कांग्रेस ने 15.2 व 22.5 फीसदी वोट हासिल किए।
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