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आस्था मुंजाल मौत केस: मैं और उदित दोनों आएंगे...पापा, आपके साथ डिनर करेंगे
Mon, 04 Mar 2019 04:54 AM IST
Priyesh Mishra
शुजात आलम, दिल्ली
शुजात आलम, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 04 Mar 2019 04:54 AM IST
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मृतका डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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पापा कल रात मैं और उदित डिनर आपके साथ करेंगे...। आस्था के परिजन यह कहते हुए फफक पड़े। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि जिस बेटी के घर आने का इंतजार कर रहे थे, वह दुनिया ही छोड़ गई। आस्था ने शनिवार दिन में अपने पिता से मोबाइल फोन पर चैट कर रविवार शाम अपने मायके आकर डिनर करने का वादा किया था।
हमेशा से पढ़ाई में टॉपर रही आस्था का चयन आईआईटी और एमबीबीएस में हो गया था, लेकिन उसने इंजीनियरिंग करने से डॉक्टर बनना बेहतर समझा और वहां भी टॉप करती रही। वह एमडी करने के बाद भी सुपर स्पेशलिटी क्रिटीकल केयर की पढ़ाई व नौकरी एक साथ कर रही थी।
आस्था के माता-पिता एस-1/96, तीसरी मंजिल पंचशील पार्क, दक्षिण दिल्ली में रहते हैं। परिवार में पिता रमेश मुंजाल, मां श्वेता व भाई आनंद है। परिवार का अपना कारोबार है। एक रिश्तेदार ने बताया कि शादी के बाद आस्था पूसा रोड स्थित ससुराल में रह रही थी। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था।
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शनिवार को आस्था ने नया मोबाइल खरीदा था। दोपहर में खाना खाने के बाद वह पति के साथ मोबाइल का नया कवर भी खरीदने गई थी। इसके बाद शाम करीब 4.15 बजे वह घर से अस्पताल के लिए निकल गई।
रात 10.45 बजे आस्था ने उदित से बिल्कुल सामान्य हालत में बातचीत की। उसने किसी तरह की परेशानी या अन्य किसी बात का जिक्र पति से नही किया था। उदित से उसने रविवार को अपने घर जाने के बारे में बताया था। ऐसे में उसके परिजन कतई मानने को तैयार नहीं है कि उसने आत्महत्या की है।
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हमेशा से पढ़ाई में टॉपर रही आस्था का चयन आईआईटी और एमबीबीएस में हो गया था, लेकिन उसने इंजीनियरिंग करने से डॉक्टर बनना बेहतर समझा और वहां भी टॉप करती रही। वह एमडी करने के बाद भी सुपर स्पेशलिटी क्रिटीकल केयर की पढ़ाई व नौकरी एक साथ कर रही थी।
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आस्था के माता-पिता एस-1/96, तीसरी मंजिल पंचशील पार्क, दक्षिण दिल्ली में रहते हैं। परिवार में पिता रमेश मुंजाल, मां श्वेता व भाई आनंद है। परिवार का अपना कारोबार है। एक रिश्तेदार ने बताया कि शादी के बाद आस्था पूसा रोड स्थित ससुराल में रह रही थी। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था।
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शनिवार को आस्था ने नया मोबाइल खरीदा था। दोपहर में खाना खाने के बाद वह पति के साथ मोबाइल का नया कवर भी खरीदने गई थी। इसके बाद शाम करीब 4.15 बजे वह घर से अस्पताल के लिए निकल गई।
रात 10.45 बजे आस्था ने उदित से बिल्कुल सामान्य हालत में बातचीत की। उसने किसी तरह की परेशानी या अन्य किसी बात का जिक्र पति से नही किया था। उदित से उसने रविवार को अपने घर जाने के बारे में बताया था। ऐसे में उसके परिजन कतई मानने को तैयार नहीं है कि उसने आत्महत्या की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट खोलेगी मौत का राज
डॉक्टर आस्था की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मौत के पीछे कोई न कोई बड़ी साजिश है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद मौत के वास्तविक कारणों से पर्दा उठ पाएगा। परिजनों का कहना है कि रात 12.15 बजे की अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज देखी है, जिसमें आस्था सहज दिख रही है।
परिजन जितेंद्र हरदोई ने बताया कि जिस दवा से आस्था की मौत की बात की जा रही है उसकी पूरी शीशी कोई अपने आप नही ले सकता है। इंजेक्शन लेने के 15 से 20 सैकंड में दवा का असर हो जाता है और दवा लेने वाला बेहोश हो जाता है। शव की जांच की गई तो उसके बाएं हाथ पर जबरदस्ती के निशान हैं।
जितेंद्र का आरोप है कि कुछ मरीजों का कहना है कि रात करीब 12.30 बजे अस्पताल में अचानक डॉक्टरों की मूवमेंट देखी गई थी। इसके अलावा परिजनों ने जब अस्पताल के इंचार्ज से बातचीत करने का प्रयास किया तो वह गोलमोल बात कर खिसक गया। ऐसे में उन्हें शक है कि अस्पताल प्रशासन उनसे कुछ छुपाने का प्रयास कर रहा है।
सवाल मांगे जवाब
-जिस दवा से आस्था की मौत की आशंका है, वह अस्पताल में नहीं मिलती?
-अस्पताल प्रशासन को तड़के 4.50 बजे आस्था की मौत का पता चल गया था तो 6.50 बजे क्यों सूचना दी गई?
-जिस कमरे में आस्था का शव मिला, उसका दूसरा दरवाजा भी है, जिसकी चाबी बाहर रहती है, फिर उसे क्यों नही खोला गया?
-कहीं ऐसा तो नहीं है कि किसी ने आस्था की हत्या करने के लिए दूसरे दरवाजे का इस्तेमाल किया हो?
''डॉक्टर की मौत कैसे हुई, फिलहाल यह जांच का विषय है। क्राइम टीम व अन्य विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाए हैं। सीरिंज व इंजेक्शन की बोतल को कब्जे में ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।''
मोनिका भारद्वाज, पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त
परिजन जितेंद्र हरदोई ने बताया कि जिस दवा से आस्था की मौत की बात की जा रही है उसकी पूरी शीशी कोई अपने आप नही ले सकता है। इंजेक्शन लेने के 15 से 20 सैकंड में दवा का असर हो जाता है और दवा लेने वाला बेहोश हो जाता है। शव की जांच की गई तो उसके बाएं हाथ पर जबरदस्ती के निशान हैं।
जितेंद्र का आरोप है कि कुछ मरीजों का कहना है कि रात करीब 12.30 बजे अस्पताल में अचानक डॉक्टरों की मूवमेंट देखी गई थी। इसके अलावा परिजनों ने जब अस्पताल के इंचार्ज से बातचीत करने का प्रयास किया तो वह गोलमोल बात कर खिसक गया। ऐसे में उन्हें शक है कि अस्पताल प्रशासन उनसे कुछ छुपाने का प्रयास कर रहा है।
सवाल मांगे जवाब
-जिस दवा से आस्था की मौत की आशंका है, वह अस्पताल में नहीं मिलती?
-अस्पताल प्रशासन को तड़के 4.50 बजे आस्था की मौत का पता चल गया था तो 6.50 बजे क्यों सूचना दी गई?
-जिस कमरे में आस्था का शव मिला, उसका दूसरा दरवाजा भी है, जिसकी चाबी बाहर रहती है, फिर उसे क्यों नही खोला गया?
-कहीं ऐसा तो नहीं है कि किसी ने आस्था की हत्या करने के लिए दूसरे दरवाजे का इस्तेमाल किया हो?
''डॉक्टर की मौत कैसे हुई, फिलहाल यह जांच का विषय है। क्राइम टीम व अन्य विशेषज्ञों ने साक्ष्य जुटाए हैं। सीरिंज व इंजेक्शन की बोतल को कब्जे में ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा।''
मोनिका भारद्वाज, पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त