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दिल्ली: राजधानी में कारोबार और निर्माण की अड़चनें नवंबर तक होंगी दूर, 48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जारी
Thu, 29 Oct 2026 07:37 PM IST
विकास कुमार
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विकास कुमार
Updated Thu, 29 Oct 2026 07:37 PM IST
सार
दिल्ली के 48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। वहीं, दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह मंत्रालय भेज दिया गया है। इसका मकसद कारोबार से जुड़ी सरकारी मंजूरियों को आसान बनाना है।
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उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली में कारोबार करने, दुकान चलाने, भवन बनाने और जरूरी सरकारी मंजूरी लेने में आ रही अड़चनें नवंबर के अंत तक दूर करनी होंगी। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गुरुवार को अधिकारियों को लंबित सुधार पूरे करने का निर्देश दिया। उन्होंने उद्योग विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि जिन समस्याओं का समाधान बैठक में ही हो सकता है, उन्हें बार-बार लंबित न रखा जाए।
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48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जारी
दिल्ली में कारोबार करना आसान बनाने और आम लोगों को नियमों के बोझ से राहत देने के लिए चल रही इस कवायद में 48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। वहीं, लाइसेंस, बिजली कनेक्शन, भवन निर्माण और निजी स्कूलों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव, एमसीडी आयुक्त, गृह विभाग के प्रधान सचिव, डीडीए उपाध्यक्ष और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एलजी ने सभी विभागों को बाकी सुधारों पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए।
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कई बार समय सीमा बीती, अधिकारियों को फटकार
अधिकारियों ने बताया, दिल्ली में नियमों को सरल बनाने के पहले चरण में 23 में से 22 सुधार पूरे हो चुके हैं। अगस्त की समीक्षा में 17 सुधार ही पूरे हुए थे। ग्रामीण इलाकों में उद्योगों के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई तय करने का नियम बदलना बाकी है। दूसरे चरण में 23 जरूरी और पांच वैकल्पिक क्षेत्रों में सुधार किए जा रहे हैं।
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48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना जारी
दिल्ली के 48 गांवों के शहरीकरण की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित हो चुकी है। वहीं, दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 को कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह मंत्रालय भेज दिया गया है। इसका मकसद कारोबार से जुड़ी सरकारी मंजूरियों को आसान बनाना है। इसमें एकल नोडल एजेंसी की व्यवस्था भी शामिल है।
दुकानों, बिजली कनेक्शन और भवन मंजूरी में राहत
दुकानों के पंजीकरण को स्थायी बनाने और नगर निगम के दोहरे लाइसेंस खत्म करने पर काम चल रहा है। 200 किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन के लिए निरीक्षण की अनिवार्यता हटाने का प्रस्ताव है। भवन योजना की मंजूरी के लिए जल बोर्ड, अग्निशमन सेवा, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण समिति के चार अनापत्ति प्रमाणपत्रों को अलग करने पर भी डीडीए और एमसीडी काम कर रहे हैं।
निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के नियम बदलेंगे
निजी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से जुड़े नए नियमों की अधिसूचना जारी हो चुकी है। स्कूलों का जरूरी प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन उपलब्ध है। इसे और सरल करने तथा स्कूलों के निर्माण नियम आसान बनाने पर विचार हो रहा है। निजी विश्वविद्यालय विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें जमीन, निधि और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी शर्तों में बदलाव का प्रावधान है।
भूमि उपयोग और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार बाकी
भूमि उपयोग के नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी लंबित है। इसका संबंध पीएम-उदय योजना से है। डॉक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया आसान करने और स्वास्थ्य सेवाओं के लाइसेंस के लिए एकल नोडल एजेंसी बनाने पर भी काम चल रहा है। बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान अधिनियम को खत्म करने का विधेयक विधानसभा से पारित हो चुका है।