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दिल्ली न्यायिक सेवा संघ ने नई पेंशन योजना को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Tue, 04 Feb 2020 06:37 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 04 Feb 2020 06:37 AM IST
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Delhi Judicial Service Association challenged the new pension scheme in high court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

न्यायिक अधिकारियों के लिए बनी दिल्ली सरकार की नई पेंशन योजना को दिल्ली न्यायिक सेवा संघ ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यह योजना एक जनवरी 2004 के बाद नियुक्त न्यायिक अधिकारियों पर लागू होती है। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर केन्द्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। 

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न्यायमूर्ति एके चावला की एकल पीठ ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से याचिका में उठाए गए सवालों का जवाब मांगा। इस याचिका में दावा किया गया है कि उक्त योजना सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का उल्लंघन करती है क्योंकि योजना के तहत न्यायिक अधिकारियों को नौकरशाहों के बराबर माना गया है।
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याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया कि वह न्यायिक अधिकारियों पर लागू होने वाली नई पेंशन योजना को रद्द कर दे क्योंकि उक्त योजना के प्रावधान कथित रूप से जस्टिस शेट्टी आयोग की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हैं।
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याचिका में योजना में तय लाभों के पूर्व व्यापी उपयोग को भी चुनौती दी गई है। वर्तमान में जो योजना लागू है, उसके दिशानिर्देशों को अखिल भारतीय न्यायाधीश एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1989) के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया था।

उक्त योजना के तहत पेंशन के रूप में न्यायिक अधिकारियों को दिए गए अंतिम वेतन के न्यूनतम 50 प्रतिशत की गारंटी दी जाती है। हालांकि, नई पेंशन योजना के तहत पेंशन के लिए कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की 10 प्रतिशत अनिवार्य कटौती और इसी के बराबर केंद्र सरकार द्वारा योगदान दिए जाने का प्रावधान है। 

याचिका में कहा गया है कि नई योजना के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्ति पर अपनी कुल पेंशन की मात्र 60 प्रतिशत राशि ही निकाल सकते हैं और शेष 40 प्रतिशत राशि अनिवार्य रूप से बीमा वार्षिकी योजना में जमा/ निवेश करना आवश्यक है।


याचिकाकर्ताओं का दावा है कि दिल्ली सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना, न्यायिक अधिकारियों को देय वेतन और पेंशन की मात्रा को संशोधित करने की कोई शक्ति नहीं है। 

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