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दिल्ली हिंसा पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- भड़काऊ भाषणों पर हो एफआईआर दर्ज

Wed, 26 Feb 2020 05:07 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 26 Feb 2020 05:07 PM IST
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Delhi HC asks police to remain present in the court during hearing of plea on violence live updates
दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला

संशोधित नागरिकता कानून(सीएए) को लेकर उत्तरपूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हुुई। न्यायालय ने कहा कि अगर भड़काऊ भाषण देने पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी तो ऐसे भाषण बढ़ते ही जाएंगे। कोर्ट ने पूछा, 15 दिसंबर से 26 फरवरी आ गई और अभी तक कोई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई है। कोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वो दिल्ली पुलिस कमीशनर को हमारी नाराजगी के बारे में बता दें। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि पुलिस को आखिर कितनी मौतों और नुकसान का इंतजार है। जनता की सुरक्षा पुलिस की ड्यूटी है। अदालत में इस मामले पर पांच घंटे के अंदर तीन बार सुनवाई हुई। 

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तीसरी सुनवाई में क्या हुआ
  • तीसरी बार जब अदालत की सुनवाई शुरू हुई तो सॉलिसीटर जनरल(एसजी) ने अदालत को बताया कि जहां तक दूसरे और तीसरे क्लिप की बात है तो वह उनका अब भी परीक्षण चल रहा है। हमें सभी तरफ से सबूत मिले हैं।
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  • एसजी ने आगे कहा कि जहां तक कपिल मिश्रा के क्लिप की बात है तो इसमें जो सामग्री है उसका हिंसा की घटनाओं से सीधा कोई संबंध नहीं है।
  • एसजी ने आगे कहा कि जहां तक बात एफआईआर की है तो यह गंभीर मामला है और हमें इसके लिए समय चाहिए ताकि सभी सामग्रियों को देखा जा सके। हमें समझना होगा कि यह संवेदनशील मामला है।
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  • इस पर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा कि कानून के अनुसार पुलिस अधिकारियों को मुझे रिपोर्ट करना चाहिए। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ।
  • राहुल मेहरा ने आगे कहा कि मैंने कई बार पुलिस कमिश्नर को कोर्टरूम में कहा है कि मैं अदालत के एक अधिकारी की तरह बर्ताव करूंगा। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को तभी रिकॉर्ड में रखा जा सकता है जब यह मेरे दफ्तर से भेजा जाए।
  • सरकारी वकील ने आगे कहा कि मुझे कोई कारण नहीं दिखाई देता एफआईआर रजिस्टर न होने का। यह हर किसी के खिलाफ दायर हो सकता है। अगर वह गलत साबित हों तो उसे रद्द भी किया जा सकता है।
  • एसजी ने अदालत में एक आवेदन डाला कि भारत सरकार को भी इस याचिका में अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।
  • हर्ष मंदेर के वकील कोलिन गोंजालविस ने तब अदालत में कहा कि यह अदालत में आए सबसे गंभीर केसों में से एक है। यह हैरत वाली बात है कि राज्य कह रहा है कि उसे एफआईआर रजिस्टर करने के लिए समय चाहिए।
  • वकील कोलिन ने आगे कहा कि वो सिर्फ भाषण देते हैं और उनसे संबंद्ध लोग अन्य लोगों को हमला करते हुए नारे लगाते हैं 'गोली मारो गद्दारों को'।
  • कोलिन ने कहा कि यह अनुराग ठाकुर की स्पीच है जिसने ये किया। अनुराग ठाकुर एक सार्वजनिक चेहरा हैं, उनके भाषण को हर जगह फैलाया गया। यह वही नारा है जिसने 18 लोगों की जान ले ली। इसके बाद कोलिन ने अनुराग ठाकुर की क्लिप भी कोर्ट में दिखाई।
  • कोलिन ने अदालत में अभय वर्मा और कपिल मिश्रा के भाषणों की क्लिप भी दिखाई और कहा कि यह लोग अपने समर्थकों को हथियार उठाने के लिए उकसा रहे हैं।
  • इस पर जस्टिस मुरलीधर ने अदालत में मौजूद पुलिस अधिकारी को भी वो वीडियो दिखाया।
  • कोलिन ने प्रवेश वर्मा का भाषण भी अदालत में दिखाया। उन्होंने बताया कि यह चार क्लिप बड़े पैमाने पर फैलाई गई थी। यह लोग सांसद और विधायक हैं।
  • कोलिन ने आगे कहा कि यह तथ्य है कि यह सभी सरकारी अमले में काफी सीनियर पोजिशन पर हैं, यह दिखाता है कि यह नैरेटिव सरकारी नीति के अनुसार ही चलाया गया है।
  • यह लोग अपने गैंग द्वारा लोगों के मारे जाने का के आरोपी हैं। इसके बाद कोलिन ने आईपीसी की उन धाराओं को अदालत में पढ़ा जिसके अनुसार कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा पर कार्रवाई चाहते हैं।

दूसरी सुनवाई में क्या हुआ
मामले की सुनवाई दोबारा शुरू हुई तो जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि परिस्थिति बहुत ही खराब है। हम सबने वो वीडियो देखे हैं जिसमें कई नेता घृणास्पद भाषण दे रहे हैं। यह सभी न्यूज चैनलों पर देखा गया है।

इसके बाद अदालत ने सभी वकीलों और डीसीपी देव और सॉलिसीटर तुषार मेहता की उपस्थिति में भाजपा नेता कपिल मिश्रा का वो वीडियो चलाया। इसके बाद जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि हम पुलिस के रवैये से हैरान हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने एसजी को भी निर्देश दिया कि वो दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सलाह दें कि भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। मामले की सुनवाई को 2.30 बजे तक के लिए टाल दिया गया है।

अदालत ने पुलिस से बुधवार दोपहर 12:30 बजे तक हिंसा को लेकर जवाब देने को कहा था। न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि तथ्यों से वाकिफ वरिष्ठ स्तर का एक पुलिस अधिकारी 12:30 बजे तक उनके समक्ष पेश हो।

पहली सुनवाई में क्या हुआ
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस को हिंसा के मामलों में अदालत के निर्देश की जरूरत नहीं होती है और उसे स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि यह बेहद जरूरी है। मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोनसाल्व्जि ने न्यायमूर्ति मुरलीधर की पीठ से इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की।



 

सीबीएसई परीक्षा का स्थायी समाधान निकाले: हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा के जिन छात्रों के बोर्ड परीक्षा केंद्र हिंसा से प्रभावित उत्तर पूर्वी दिल्ली में हैं उन्हें अगले 10-15 दिनों के लिए परीक्षाओं के कार्यक्रम के बारे में एक बार में बताया जाए न कि रोज-रोज के आधार पर।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हालात खराब हो रहे हैं और वहां और मौतें हुई हैं, इसलिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को अगले 10-15 दिनों के लिए कोई फैसला लेने की जरूरत है।

अदालत ने कहा कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हालात बिगड़ रहे हैं। आपको स्थिति शांत होने के लिए वक्त देना चाहिए। अदालत ने कहा कि आप सिर्फ कल या परसों के लिए फैसला नहीं कर सकते। अगले 10-15 दिनों के लिए फैसला लीजिए। बच्चों को परीक्षाओं के कार्यक्रम के बारे में जानने की जरूरत है। वे हर दिन, अगले दिन के लिए इंतजार नहीं कर सकते।

अदालत ने सीबीएसई को दीर्घकालीन योजना के बारे में निर्देशों के साथ सूचित करने के लिए कहा है। कहा कि सभी विकल्पों पर विचार कीजिए, खासतौर से 12वीं कक्षा के संबंध में।

 

पुलिस से केवल परीक्षा केंद्रों की निगरानी करने की उम्मीद नहीं की जा सकती

दरअसल सीबीएसई ने बुधवार को कहा कि हिंसाग्रस्त उत्तरपूर्वी दिल्ली में 86 स्कूलों में परीक्षाएं टाल दी गई हैं, जिसपर अदालत ने यह निर्देश दिया। सीबीएसई ने अदालत को यह भी बताया कि गुरुवार को होने वाली परीक्षाओं के लिए शाम को फैसला लिया जाएगा। अदालत इस समाधान से सहमत नहीं हुई। अदालत का कहना है कि पुलिस से परीक्षा केंद्रों की निगरानी करने की उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि उन्हें दंगा भी रोकना है।

अदालत ने कहा कि पुलिस पर पहले ही काफी दबाव है। कैसे वे केवल स्कूल की निगरानी करेंगे? क्या होगा, अगर कहीं अचानक दंगा हो जाए, तो पुलिस इस दुविधा में होगी कि स्कूल को छोड़कर जाए या नहीं।

अदालत पूर्वी दिल्ली में निजी स्कूल भाई परमानंद विद्या मंदिर और उसके 10वीं तथा 12वीं के कुछ छात्रों की याचिका पर सुनवाई कर रही है। छात्रों ने कहा कि सीबीएसई द्वारा उन्हें आवंटित किए गए केंद्र उनके स्कूल से 16 किलोमीटर दूर और हिंसाग्रस्त इलाकों में से एक चंदू नगर-करावल नगर रोड पर है।

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