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Delhi EV Policy: हाइब्रिड को प्रोत्साहन पर अटका ईवी पॉलिसी 2.0 का फैसला, मंत्रियों के एक समूह ने जताई चिंता

Sat, 27 Jun 2026 01:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 27 Jun 2026 01:23 AM IST
सार

एक पक्ष 30 लाख रुपये तक के स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट देने के पक्ष में है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी प्रोत्साहन केवल बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) तक सीमित रखने की वकालत कर रहा है।

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Delhi EV Policy: Decision on EV Policy 2.0 stalled over incentives for hybrids
हालांकि सरकार नई नीति को तत्काल लागू करने की तैयारी में है। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी 2.0 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव सबसे बड़ा पेच बन गया है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के समूह में इस मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई है। 

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एक पक्ष 30 लाख रुपये तक के स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट देने के पक्ष में है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी प्रोत्साहन केवल बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) तक सीमित रखने की वकालत कर रहा है। इसी मतभेद के कारण ईवी पॉलिसी 2.0 पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है।
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मौजूदा दिल्ली ईवी नीति 30 जून को समाप्त हो रही है और सरकार नई नीति को तत्काल लागू करने की तैयारी में है। यह 2030 तक प्रभावी रहेगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 12 जून तक दिल्ली में पेट्रोल के बाद हाइब्रिड वाहन दूसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन चुके हैं। 
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कुल वाहन पंजीकरण में इनकी हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10.3 प्रतिशत और डीजल वाहनों की पांच प्रतिशत रही। वर्ष 2021 में हाइब्रिड वाहनों की हिस्सेदारी 4.5 प्रतिशत थी। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी 1.1 प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

सरकार के भीतर एक मत यह है कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन उन लोगों के लिए व्यावहारिक विकल्प हैं, जो अभी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्राइविंग रेंज और शुरुआती कीमत जैसी वजहों से पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में संकोच कर रहे हैं। 

अधिकारियों का मानना है कि हाइब्रिड वाहन ईंधन की खपत कम करते हैं, पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में कम उत्सर्जन करते हैं और सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर भी नहीं रहते। ऐसे में इन्हें स्वच्छ परिवहन की दिशा के रूप में देखा जा सकता है। 


कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि नीति का मुख्य उद्देश्य शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देना होना चाहिए। उनका सुझाव है कि सरकारी संसाधनों को बैटरी तकनीक, चार्जिंग नेटवर्क और अन्य शून्य-उत्सर्जन तकनीकों के विकास पर केंद्रित किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि ईवी पॉलिसी 2:0 पर अंतिम फैसला दिल्ली मंत्रिमंडल को करना है।

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