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Delhi Coaching Centre incident: कोचिंग सेंटर का जुगाड़ बना हादसे का कारण... MCD की इस लापरवाही से गईं तीन जान

Tue, 30 Jul 2024 01:05 PM IST
शाहरुख खान शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 30 Jul 2024 01:05 PM IST
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Delhi Coaching Centre incident MCD negligence and coaching centers arrangement became the cause of accident
Delhi Coaching Centre incident - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के राजेंद्र नगर के बड़ा बाजार रोड पर कई दशकों से बरसात का पानी भरता आ रहा है। दरअसल पुराना राजेंद्र नगर का एरिया निचला इलाका है। बारिश में रिज एरिया और न्यू राजेंद्र नगर का पानी बहुत तेजी से बहकर बड़ा बाजार रोड पर आता है। दुरुस्त ड्रेनेज सिस्टम से पहले पानी कुछ ही देर में निकल जाया करता था, लेकिन एमसीडी की लापरवाही से पूरे एरिया का ड्रेनेज सिस्टम लगभग ठप पड़ा हुआ था। 
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ऐसे में बारिश के बाद यहां से पानी उतरने में चार से छह घंटे तक लग जाया करते थे। मजबूर होकर यहां के ज्यादातर कोचिंग सेंटरों ने जुगाड़ कर अपने मेन गेट पर स्लाइडिंग डोर लगाया हुआ है। बारिश होते ही दरवाजों को बंद कर दिया जाता है। इन दरवाजों से काफी हद तक पानी अंदर आने से रुक जाता है। 
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शनिवार को जब चार से पांच फीट पानी भरा तो महज एक गाड़ी निकलने से उठी लहर से दरवाजा गिर गया और पानी सैलाब की तरह बेसमेंट में घुस गया और छात्रों की मौत हो गई। पुलिस हादसे के आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। राजेंद्र नगर में रहने वाले कुलदीप सिंह ने बताया कि वह बचपन से बड़ा बाजार रोड पर पानी भरता देख रहे हैं। 
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इस रोड पर कई कोचिंग सेंटर हैं। ज्यादातर या तो सड़क के लेवल में बने हैं या इनका पार्किंग एरिया एक या डेढ़ फीट है। ऐसे में बारिश के दौरान यहां पानी भरना तय है। सिमरनजीत सिंह ने बताया कि कोचिंग सेंटर वालों ने फुटपाथ एरिया में बने नाले पर अतिक्रमण कर उसे बंद कर दिया था। 
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एमसीडी को चाहिए था कि नाले को पहले अतिक्रमण मुक्त कराकर यहां पानी निकासी की व्यवस्था करती, लेकिन हादसे के बाद एजेंसियां सोते हुए जागती हैं। पुलिस ने हादसे के लिए गाड़ी चालक मनोज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उपायुक्त एम हर्षवर्धन का कहना है कि चालक ने जानबूझकर गाड़ी को तेज चलाया। ऐसा करने से दूसरे के घरों व दफ्तर में पानी जाने की संभावना बनी।
 

बायोमेट्रिक बना छात्रों के लिए काल, हादसे के समय नहीं खुला गेट
राजेंद्र नगर के स्टडी सेंटर में पानी भरना शुरू हुआ तो बेसमेंट के दरवाजे पर लगा बायोमेट्रिक डोर फेल हो गया। दरअसल पानी भरते ही स्टडी सेंटर की बत्ती गुल हो गई। अंधेरे और पानी के बीच छात्रों ने निकलने की कोशिश की, लेकिन वह अंदर ही फंस गए। बेसमेंट में आने और जाने के लिए दो जीने बने हुए हैं। कुछ ने दूसरे रास्ते की ओर जाने का प्रयास किया तो वह अंधेरे में फंस गए।

 

इस बीच सामने की ओर लगा कांच का दरवाजा टूट गया और छात्रों ने वहां से भागकर जान बचाई। यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों का आरोप है कि पूरे ही राजेंद्र नगर के ज्यादातर कोचिंग सेंटरों में बायोमेट्रिक डोर से एंट्री है। किसी भी हादसे के समय यह डोर बड़ी मुसीबत बन सकते हैं, राव आईएएस स्टडी सेंटर वाले हादसे में ऐसा ही हुआ।

 

स्टडी सेंटर में यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र मनीष कुमार ने बताया कि 27 जुलाई को जो हुआ उसकी कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। किसी छात्र ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि बायोमेट्रिक दरवाजे भी उनके लिए खतरा हो सकते हैं। शनिवार को बेसमेंट में पानी आया तो शीशे का दरवाजा जाम हो गया और छात्र अंदर ही फंस गए।
 

मनीष का कहना था कि बायोमैट्रिक के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। ज्यादातर इमारतों में बेसमेंट के अलावा ऊपर की मंजिलों पर जाने के लिए इसी तरह के दरवाजे लगे हुए हैं। इन इमारतों में एसी लगा होने की वजह से बालकनी की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में हादसे के समय छात्रों के फंसने की पूरी आशंका है।

दूसरी ओर दमकल विभाग के डिविजनल ऑफिसर मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि बेसमेंट के मेन गेट पर लगा दरवाजा पानी की रफ्तार से टूट गया। उनकी टीम जब पहुंची तो दरवाजा टूट चुका था। वहीं मामले पर मध्य जिला पुलिस उपायुक्त एम हर्षवर्धन ने बताया कि यहां बायोमैट्रिक दरवाजा था या नहीं इसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

80 फीसदी इमारतों में बायोमेट्रिक इंतजाम
छात्र पुनीत ने बताया कि एरिया की लगभग 80 फीसदी इमारतों में इसी तरह के इंतजाम हैं। इमारतों को लाइसेंस देने वाली सिविक एजेंसियों को इस ओर ध्यान देकर सभी इमारतों की जांच करनी चाहिए। कोचिंग सेंटर छात्रों से मोटी फीस लेकर उनकी मजबूरियों को फायदा उठाते हैं। चाहकर भी कोचिंग सेंटरों के खिलाफ शिकायत नहीं की जाती।
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