कांग्रेस दो दिनों में जारी करेगी घोषणा पत्र, प्रत्याशियों को नहीं होगी मुद्दों की कमी
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विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने घोषणा पत्र तैयार कर लिया है। घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष अजय माकन विदेश से लौट आए हैं, और बुधवार तक घोषणा पत्र जारी किए जाने की उम्मीद है। इससे प्रत्याशियों को पार्टी की नीतियों को जनता के बीच रखने का मौका मिलेगा।
चुनाव घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष अजय माकन निजी कार्यों की वजह से विदेश यात्रा पर थे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा का कहना है कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता पार्टी की स्थिति को और सुदृढ़ करने में जुटे हुए हैं।
पार्टी अध्यक्ष ने दावा किया कि इस चुनाव में सभी सीटों पर जीत मिलेगी। शाहीन बाग के मामले में दूसरी पार्टियों ने चुप्पी इसलिए तोड़ी, क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि और देरी हुई तो कांग्रेस को कहीं इसका फायदा न मिल जाए। हालांकि कांग्रेस ने वोट की राजनीति से दूर, पहले दिन से संविधान के साथ किए गए छेड़छाड़ पर विरोध दर्ज कराया है और आगे भी जारी रहेगा।
प्रत्याशियों को अभी भी स्टार प्रचारकों का इंतजार
कांग्रेस प्रत्याशियों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में अधिकाधिक समर्थन हासिल करने के लिए स्टार प्रचारकों का इंतजार है। कांग्रेस के आला नेताओं के रोड शो भी अभी नहीं
हुए हैं। इनमें प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर, शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राज बब्बर आदि शामिल हैं।
कांग्रेस प्रदर्शनकारियों के साथ : सुभाष चोपड़ा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि उनकी पार्टी शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के साथ है और रहेगी। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग में बीते एक महीने से भी अधिक समय से विरोध दर्ज करवा रहीं महिलाएं वीरांगनाएं हैं। जामिया में बच्चों की लाइब्रेरी में पिटाई पर देश की माताओं ने विरोध जताया है। चोपड़ा ने कहा कि जामिया में पुलिस बर्बरता के विरोध में न तो भाजपा आई और न ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। करीब 40 दिन बाद मनीष सिसोदिया पहली बार इस मामले में सामने आए। कांग्रेस ऐसी पार्टी हैं, जिसने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में चले प्रदर्शनों का समर्थन किया है। इसमें संविधान की अनदेखी की गई है। जनता भाजपा और आप की चुप्पी का हिसाब चुनाव में लेगी।
चोपड़ा ने जेएनयू और जामिया में पुलिस की बर्बरता के बाद भी सरकारों की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा कि जामिया में बगैर इजाजत विश्वविद्यालय परिसर में घुसकर पुलिस ने कार्रवाई की तो दूसरी तरफ जेएनयू में नकाबपोश बदमाशों की तरफ से की गई मारपीट की घटना पर पुलिस की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिरकार, किसके इशारे पर ऐसा किया गया।