Nithari Kand: निठारी केस के पीड़ितों का केस लड़ेगी DDRWA, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जाएगी सुप्रीम कोर्ट
डीडीआरडब्ल्यूए ने जनसहयोग से उच्चतम न्यायालय में केस लड़ने का फैसला किया है। यह केस सेक्टर-41 में रहने वाली उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता अनीता पांडेय व उनकी टीम लड़ेगी।
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मानवता को कलंकित व रूह कंपा देने वाले निठारी मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर के जेल से रिहा होने के बाद मायूस पीड़ित परिवारों को फिर से न्याय की उम्मीद जगी है। डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (डीडीआरडब्ल्यूए) ने निठारी कांड के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। डीडीआरडब्ल्यूए ने जनसहयोग से उच्चतम न्यायालय में केस लड़ने का फैसला किया है। यह केस सेक्टर-41 में रहने वाली उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता अनीता पांडेय व उनकी टीम लड़ेगी।
इस मामले में डीडीआरडब्ल्लूए के अध्यक्ष एनपी सिंह व उनकी टीम ने अधिवक्ता अनीता पांडेय के साथ सोमवार को निठारी गांव जाकर पीड़ित परिवार के लोगों से मुलाकात की और उनसे पेपर पर साइन कराते हुए मामले को देश की सबसे शीर्ष अदालत तक ले जाने का आश्वासन भी दिया। टीम ने पीड़ित झब्बू, उनकी पत्नी सुनीता, रामकृष्ण और जमुना प्रसाद से मुलाकात की। टीम ने यह भी कहा कि निठारी कांड से संबंधित मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर को शहर में घुसने नहीं दिया जाएगा। निठारी कांड में बरी होने वाला मोनिंदर सिंह पंढेर 17 साल बाद जेल से रिहा हुआ है।
लुक्सर जेल से छूटने के बाद उसके परिजन अपने साथ शहर से बाहर ले गए। नोएडा के निठारी गांव में स्थित डी-5 कोठी के पास कंकाल और कोठी के अंदर से कपड़े, खिलौने, चप्पल आदि मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत से पंढेर को फांसी की सजा सुनाई गई थी। प्रयागराज उच्च न्यायालय ने उसे रिहा कर दिया। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। नोएडा के सबसे चर्चित निठारी कांड के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए डीडीआरडब्ल्यूए ने कदम आगे बढ़ाए हैं, जिससे पीड़ितों को एक बार फिर से न्याय की उम्मीद जगी है।
निठारी कांड पर एक नजर
नोएडा के सबसे चर्चित और सनसनी फैलाने वाला निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। जब मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों समेत एक युवती के कंकाल मिले थे। पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। गाजियाबाद की सीबीआई अदालत में सुरेंद्र कोली को 12 मामलों और मोनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इस साल 16 अक्टूबर को प्रयागराज उच्च न्यायालय ने पंढेर को दो मामलों में बरी कर दिया। उसके नौकर सुरेंद्र कोली को भी 14 मामलों में बरी कर दिया गया। कोली अभी दो मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
आरोपी के लिए फांसी की सजा भी कम
निठारी कांड में अपनी 10 वर्षीय बेटी ज्योति को खोने वाली मां सुनीता का कहना है कि आरोपी ने जिस निमर्मता से उनकी बेटी की हत्या की है। उसके लिए उसे फांसी की सजा मिले तो भी कब होगी। उसने कई घरों के चिराग को बुझा दिया। कई मां की कोख सूनी कर दी। उन्होंने पीएम व प्रदेश के सीएम से भी इस मामले में सहयाेग करते हुए फांसी की सजा दिलाने की मांग की है।