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बेटी ने पिता को किडनी देकर बचाई जिंदगी, दो बार फेल हो चुका था ट्रांसप्लांट
Tue, 01 Oct 2019 11:36 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 01 Oct 2019 11:36 AM IST
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फाइल फोटो
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घर के मुखिया को बचाने के लिए एक परिवार के तीन सदस्यों ने अपनी किडनी दान कर दी। सेक्टर-128 स्थित जेपी अस्पताल में सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया गया कि हापुड़, गढ़ मुक्तेश्वर निवासी काजल (21) ने अपनी किडनी देकर पिता की जान बचाई।
सुरेश कुमार डायबिटीज के मरीज हैं। पहली बार उनकी किडनी 2011 में बदली गई, तब उनकी मां ब्रह्मा देवी ने अपनी किडनी दी थी। उसके बाद दोबारा सुरेश की तबीयत बिगड़ गई। 2016 में उनकी पत्नी ने किडनी दान की, लेकिन दूसरी बार भी किडनी खराब हो गई।
तीसरी बार काजल ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। किडनी ट्रांसप्लांट के संयोजक डॉ. अमित देवरा ने बताया कि पांच सालों में अब तक 500 मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है।
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इनमें 60 फीसदी मां, पत्नी और बेटियों ने परिजनों को किडनी दान दी है। जबकि पुरुषों की संख्या 40 फीसदी है। डॉ. मनोज लूथरा ने बताया कि किडनी मरीजों को बचाने के लिए परिवार के सदस्य अब सामने आने लगे हैं।
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सुरेश कुमार डायबिटीज के मरीज हैं। पहली बार उनकी किडनी 2011 में बदली गई, तब उनकी मां ब्रह्मा देवी ने अपनी किडनी दी थी। उसके बाद दोबारा सुरेश की तबीयत बिगड़ गई। 2016 में उनकी पत्नी ने किडनी दान की, लेकिन दूसरी बार भी किडनी खराब हो गई।
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तीसरी बार काजल ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। किडनी ट्रांसप्लांट के संयोजक डॉ. अमित देवरा ने बताया कि पांच सालों में अब तक 500 मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हो चुका है।
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इनमें 60 फीसदी मां, पत्नी और बेटियों ने परिजनों को किडनी दान दी है। जबकि पुरुषों की संख्या 40 फीसदी है। डॉ. मनोज लूथरा ने बताया कि किडनी मरीजों को बचाने के लिए परिवार के सदस्य अब सामने आने लगे हैं।
कुछ साल पहले तक कुछ ही सदस्य हिम्मत कर पाते थे। लेकिन अब पति, पत्नी, भाई, बहन व परिवार के अन्य सदस्य किडनी दान करने के लिए आगे आने लगे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कई आवेदन आ रहे हैं।
डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि मोटापा, शुगर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और यूरिक एसिड भी इस रोग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जीवन शैली में बदलाव के कारण लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र में कुल आबादी के तीन फीसदी और ग्रामीण में दो फीसदी इसके शिकार हो रहे हैं।
डॉ. विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि मोटापा, शुगर, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और यूरिक एसिड भी इस रोग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जीवन शैली में बदलाव के कारण लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र में कुल आबादी के तीन फीसदी और ग्रामीण में दो फीसदी इसके शिकार हो रहे हैं।