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शादी के लिए बनाई थी लूट की योजना, जेल से छूटकर कर दी कारोबारी की हत्या   

Wed, 13 Jul 2016 07:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 13 Jul 2016 07:47 PM IST
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Booty had made plans to marry, was released from prison the murder of businessman
हत्या - फोटो : अमर उजाला

कृष्णा नगर इलाके में दो जुलाई को कारोबारी राकेश प्रसाद (44) की गोली मारकर हत्या करने की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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इनकी पहचान ज्ञानेंद्र उर्फ सागर (27), फहीम अहमद (27), मोहम्मद इमरान (25) और नवाबुद्दीन (25) के रूप में हुई है। घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी से बदमाशों की पहचान हुई।
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राकेश से 4.50 लाख रुपये लूटने के बाद बदमाशों ने उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से लूटे गए 2.68 लाख रुपये, वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल, दो कारतूस व चार खोखे बरामद किए हैं। 
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पुलिस की मानें तो ज्ञानेंद्र को अपनी शादी के लिए रुपयों की जरूरत थी, इसीलिए उसने राकेश के साथ लूट की योजना बनाई थी। पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त ऋषिपाल ने बताया कि भोलानाथ नगर निवासी कारोबारी राकेश प्रसाद दो जुलाई की रात को अपने दफ्तर से बाइक पर घर लौट रहा था। 

इस बीच भूतेश्वर मंदिर, कृष्णा नगर के पास अज्ञात बदमाशों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि राकेश का मनी ट्रांसफर का काम था। 

लूटपाट का विरोध करने पर मारी थी कारोबारी को चार गोलियां

Booty had made plans to marry, was released from prison the murder of businessman
हत्या - फोटो : अमर उजाला

वारदात वाले दिन वह दफ्तर से 4.50 लाख रुपये लेकर घर के लिए निकला था। घटना स्थल पर उनका खून से लथपथ शव पड़ा था, बाइक भी वहीं खड़ी मिली लेकिन रुपयों से भरा बैग गायब था। 

इंस्पेक्टर सीबी सिंह व अन्य ने मामले की छानबीन शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से कुछ संदिग्धों की पहचान हुई। पुलिस ने सीसीटीवी के आधार पर शकरपुर इलाके से ज्ञानेंद्र और फहीम को दबोच लिया।

बाद में दोनों की निशानदेही पर इमरान और नवाबुद्दीन को भी दबोच लिया गया। आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया। मुख्य आरोपी ज्ञानेंद्र ने बताया कि वर्ष 2007 में उसने झगड़े के दौरान हत्या कर दी थी। 

आठ साल जेल में बिताने के बाद वह पिछले वर्ष ही बाहर आया था। अब वह शादी करना चाहता था। इसके लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। अपने दोस्तों से उसे राकेश प्रसाद के बारे में पता लगा। 

उसने राकेश के दफ्तर व घर आने-जाने की रैकी की और दो जुलाई को वारदात को अंजाम दिया। लूटपाट का विरोध करने पर ज्ञानेंद्र ने राकेश पर चार गोलियां चलाई थीं, जिसमें दो गोली उसके सिर में लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

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