गाय की हत्या पर उम्रकैद तक का प्रावधान, रैश ड्राइविंग से जान लेने पर सिर्फ 2 साल की सजा
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गाय की हत्या करने पर पांच साल या सात साल या कई राज्यों में 14 साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन किसी इंसान मनुष्य की मौत के मामले में कानून में केवल दो साल की सजा का प्रावधान है।
अदालत ने उत्सव भसीन मामले में उक्त तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा मानव जीवन बहुमूल्य है, कानून में संशोधन कर ऐसे मामलों में कडी सजा का प्रावधान करने पर बल दिया है। अदालत ने फैसले की प्रति प्रधानमंत्री को भेजने का निर्देश दिया है ताकि इस मुद्दे पर उचित कदम उठाया जा सके।
बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन मामले में सोनीपत के कारोबारी के बेटे उत्सव को फिलहाल अपने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए जमानत प्रदान कर दी है। तय नियमों के तहत यदि सजा तीन वर्ष से कम हो तो दोषी को जमानत प्रदान की जाती है।
साकेत जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने अपने फैसले में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में भारत का रिकार्ड बेहद खराब है।
राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक 2015 में 4.64 लाख सड़क दुर्घटनाओं के मामले पंजीकृत हुये जिनमें 1.48 लाख लोगों की मौत हुई और 4.82 लाख लोग जख्मी हुये थे।
अदालत ने कहा कि देश में प्रत्येक मिनट एक एक्सीडेंट होता है और प्रत्येक चार मिनट में हर आदमी की सड़क हादसे में मौत होती है। अदालत ने कहा कि मानव जीवन बहुमूल्य है।
सड़क पर चलने वाले लोगों को जीवन व सुरक्षा का मूल अधिकार प्राप्त है और इसमें उनकी सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है। सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इससे वह बच नहीं सकती। यह बेहद दुखद है कि देश की राजधानी दिल्ली में गैर मोटर चालित वाहनों के लिये आरक्षित लाइन नहीं है।
पीएम ने मन की बात में भी की थी चर्चा
अदालत ने प्रधानमंत्री को फैसले की कॉपी भेजने का आदेश दिया है ताकि वह लापरवाही से जान लेने के मामले में कम सजा के प्रावधान पर जरूरी कदम उठा सकें। प्रधानमंत्री के सबका साथ सबका विकास के नारे का जिक्र करते हुये अदालत ने कहा कि यह तभी ही होगा जब लोग सड़क हादसों में न मारे जाएं।
अदालत ने फैसले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान का भी जिक्र किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सड़क हादसों में जितने लोग मारे जाते हैं उतने आतंकी घटनाओं व प्राकृतिक आपदाओं में भी नहीं मारे जाते। केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की 2014 में सड़क हादसे में मौत का जिक्र करते हुये अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में 1861 में बने कानूनी प्रावधान आज भी चल रहे हैं।