विस में मेट्रो फेज 4 पर सत्तापक्ष व विपक्ष में टकराव, मंजूरी मिलने में देरी पर एक-दूसरे पर लगाए आरोप
दिल्ली विधानसभा में बृहस्पतिवार को मेट्रो फेज-चार को दिल्ली सरकार से मिली मंजूरी का मसला गरम रहा। आप विधायक की तरफ से सदन में लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर तंज कसते हुए विपक्ष ने देरी के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जबकि सत्ता पक्ष ने फेज-चार की देरी के लिए केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। मेट्रो के किराए पर भी सत्ता पक्ष व विपक्ष में भी नोकझोंक हुई।
दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर नियम 54 के तहत नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता व आप विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने की कोशिश की। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने दोनों प्रस्ताव को पेश करने की मंजूरी नहीं दी।
इसके बाद आप विधायक महेंद्र गोयल ने दिल्ली सरकार की तरफ से मेट्रो के फेज चार को मंजूरी मिलने पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। इस पर भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता व विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार दिल्ली सरकार से मेट्रो चार की फाइल मंजूर करने की बात करती रही, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसे रोके रखा। दोनों विधायकों ने सवाल किया कि इसे मंजूर करने में करीब तीन साल देरी क्यों की गई? अब क्या हुआ कि अचानक इसे मंजूर कर दिया गया?
विपक्ष के इस सवाल पर सत्ता पक्ष के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार बराबर की भागीदार है तो मेट्रो किराया क्यों नहीं कम किया जाता? अगर किराया बढ़ने से यात्रियों की संख्या घटी तो किराया घटवाने के लिए नेता विपक्ष केंद्रीय शहरी विकास मंत्री के पास क्यों नही चलती? किराया कम करने के पक्ष में केंद्र है, राज्य है तो कम क्यों नहीं होगा?
कैलाश गहलोत ने केंद्र पर डाला जिम्मा
बहस में शामिल होते हुए परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मेट्रो फेज चार पर दिल्ली सरकार केंद्र के साथ लगातार बात कर रही थी। जीएसटी आने से दोबारा बजट का आकलन किया। फिर, सीसीटीवी और मोहल्ला क्लीनिक प्रोजेक्ट की तरह मेट्रो को भी रोकने की कोशिश हुई।
वित्त विभाग के अधिकारी फाइल अटकाते रहे। कई आपत्तियां लगाई गईं। कई रूट को नकारात्मक माना गया। कैलाश गहलोत के मुताबिक, प्रोजेक्ट की फाइल कभी भी मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने नहीं रोकी। केंद्र से भेजे अधिकारियों इसे अटकाए रखा। डीएमआसी बोर्ड से पास होने के हफ्ते भर में दिल्ली कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
उपमुख्यमंत्री ने कसा केंद्र पर तंज
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा ने शुरू से प्रोजेक्ट रोकने की कोशिश की। जहां पैसा देना होता है, वहां दिल्ली सरकार को आगे कर देते हैं, क्रेडिट लेने में केंद्र आगे रहता है। जबकि टैक्स में हिस्सेदारी भी नहीं करते। शुरू में मेट्रो फेज चार की कुल अनुमानित लागत 57000 करोड़ रुपये थी। दिल्ली सरकार की वजह से यह 11,000 करोड़ रुपये नीचे आई ।
सिसोदिया के मुताबिक, मेट्रो दिल्लीवालों का शौक नहीं, जरूरत है। विदेशों के किराए से दिल्ली में मेट्रो के किराए की तुलना नहीं की जा सकती। यहां की आमदनी भी देखनी होगी। सिसोदिया ने चेतावनी दी कि अगर किराया बढ़ाना घटाना हमारे अधिकार में आ जाए तो हम 25 फीसदी किराया कम कर सकते हैं।