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Delhi: CM केजरीवाल के आवास विवाद में एलजी ने 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट, आतिशी ने कार्रवाई को बताया असंवैधानिक

Sun, 30 Apr 2023 08:24 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 30 Apr 2023 08:24 PM IST
सार

पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर कहा कि लोक निर्माण विभाग से संबंधित सभी सरकारी कार्यों के लिए वह जिम्मेदार हैं। लिहाजा उपराज्यपाल का रिकॉर्ड को जब्त और कार्रवाई करने का निर्देश देने वाला पत्र उनके कार्यालय के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है।

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CM Kejriwal s housing dispute case Atishi called the action unconstitutional
आतिशी - फोटो : एएनआई

विस्तार

पीडब्ल्यूडी मंत्री आतिशी ने मुख्यमंत्री आवास के रेनोवेशन से संबंधित रिकॉर्ड लिए उपराज्यपाल की ओर से मुख्य सचिव को निर्देश देने संबंधी लिखे पत्र पर आपत्ति जताई है। उन्होंने पत्र लिखने के मामले में को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों, संविधान के अनुच्छेद 239एए और जीएनसीटीडी एक्ट-1993 के ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस के नियम चार(दो) का उल्लंघन किया है। दरअसल, उपराज्यपाल के पास इस प्रकार की कार्रवाई के लिए निर्देशित करने की कोई शक्ति नहीं है। वह कानून को तोड़कर किसी अधिकारी को सीधे आदेश नहीं दे सकते हैं।

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आतिशी ने इस पूरे मामले में उपराज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग से संबंधित सभी सरकारी कार्यों के लिए वह जिम्मेदार हैं। लिहाजा उपराज्यपाल का रिकॉर्ड को जब्त और कार्रवाई करने का निर्देश देने वाला पत्र न सिर्फ उनके कार्यालय के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है, बल्कि दिल्ली सरकार के संबंधित मंत्री और मंत्रिपरिषद की शक्तियों को भी दरकिनार करता है। पत्र में लगाए गए आक्षेप और आरोप पूरी तरह निराधार व योग्यता से रहित है और राजनीतिक कारणों से लिखा गया है।

आतिशी ने अपने पत्र में दिल्ली के शासन को लेकर संविधान का हवाला भी दिया है। इसे अनुच्छेद 239एए में शामिल किया गया है और राज्य (दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) बनाम भारत संघ और अन्य, (2018) 8एसीसी 501 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समझाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बंधे हैं और उन्हें कोई स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 239एए की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 284.27 अनुच्छेद 239-एए (4) में नियोजित ‘सहायता और सलाह’ का अर्थ उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद की ‘सहायता और सलाह’ मानने को बाध्य हैं और यह स्थिति तब तक सही है, जब तक उपराज्यपाल अनुच्छेद 239-एए के खंड (4) के प्रावधान के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करते हैं। उपराज्यपाल को कोई स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति नहीं है।

उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल को नियम 19(5) के तहत मंत्रिपरिषद की ओर से लाए गए फैसलों के बारे में जानकारी मांगने का अधिकार है, लेकिन एलजी को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करने की कोई शक्ति नहीं है। उपराज्यपाल कार्यालय बिना मंत्रीपरिषद की सलाह और सहायता के ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकता है। उन्होंने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि वह अपने पत्र को वापस लें और दिल्ली व लोगों के लिए संविधान द्वारा निर्धारित शासन व्यवस्था को बहाल करें। उन्होंने कहा है कि अनुच्छेद 239एए के तहत संवैधानिक योजना का लगातार स्थानांतरण दिल्ली के लोगों के लोकतांत्रिक जनादेश को नगण्य कर देगा।

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