'कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं': सौरव दास-आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ी, जानें कोर्ट ने क्या कहा
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई पर सोमवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां कोर्ट ने न्यायिक हिरासत को दो दिन के लिए बढ़ा दिया। इससे पहले दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
विस्तार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- कानून का सम्मान नहीं
एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) कोर्ट ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्तूबर तक बढ़ा दी। कोर्ट ने कहा कि उनका आचरण "कानून के प्रति सम्मान नहीं दिखाता" और वे "अधिसूचित क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन बुलाने के आदी" हैं। एसईएम रितु राज ने आदेश में बताया कि दोनों ने 11 अक्तूबर को दिए गए बांड का जानबूझकर उल्लंघन किया और शांति भंग की थी।
न्यायिक हिरासत बढ़ने पर सीजेपी ने क्या कहा
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की लीगल हेड रत्ना सिंह ने अदालत की कार्रवाई को 'मखौल' करार दिया है। उन्होंने न्यायिक हिरासत बढ़ाने को 'अस्पष्ट' और 'मानसिक यातना' बताया। रत्ना सिंह ने कहा कि पिछले छह दिनों से जमानतदार सत्यापन न होने या जमानतदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने जैसे बहाने बनाए जा रहे थे। उनके अनुसार, किसी की स्वतंत्रता को कम किया जा रहा था। दोपहर दो बजे की सुनवाई साढ़े तीन बजे शुरू हुई और एक घंटे तक चली। इसमें उनके वकीलों ने कानूनी बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने जोर दिया कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई ठोस कारण पेश नहीं किया गया। रत्ना सिंह ने कहा कि वे इस फैसले को चुनौती देंगे, क्योंकि यह आवाजों को दबाने का प्रयास है।
#WATCH | Ratna Singh, Head of Legal Affairs, CJP says, "A mockery was going on in the Court. For the last 6 days, we have been saying that one or the other reason is being nitpicked - surety verification has not been done, that FIR has been lodged against the surety. We saw someone's liberty being curtailed. The 2 pm hearing began at 3-3.30 pm. It went for an hour. Our lawyers discussed on the law points. There was nothing presented from the other side which said that there should be an extension (of judicial custody). There was no reason to keep them in further judicial custody. They have been sent to judicial custody for a very vague reason...We will challenge this. This is mental torture and an attempt to stifle voices...We can see everything, the entire world can see everything. They cannot silence everyone."
— ANI (@ANI) October 19, 2026
पांच दिन की न्यायिक हिरासत में कोर्ट ने भेजा
जानकारी के अनुसार, सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत ने पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए तिहाड़ जेल भेजने के आदेश दिए हैं। इन दोनों नेताओं पर पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। वहीं दूसरी ओर, इसी मामले में शामिल तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को राहत देते हुए अदालत ने उनसे नया बेल बॉन्ड भरवाकर प्रक्रिया पूरी की है।
तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद भी सीजेपी के नेताओं ने वहां विरोध प्रदर्शन किया। रांका, दास और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पार कर अंदर पहुंचे और तिरंगा लहराते हुए नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब सीजेपी और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं।
अभिजीत दिपके ने पुलिस के एक्शन पर उठाए थे सवाल
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है? उन्होंने कहा कि आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गलती? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना। थोड़ी हिम्मत दिखाइए, नरेंद्र मोदी। अगर आप विरोध की आवाज को दबाने के लिए इतने ही पक्के इरादे वाले हैं, तो इन कायरतापूर्ण तरीकों की आड़ लेने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखाइए।
तिरंगा लहराने पर जेल भेजा: अजिंक्य शिंदे
सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने के कारण अशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि आज अशुतोष का जन्मदिन है और इसी दिन उन्हें जेल भेजा गया। शिंदे ने मोदी-शाह सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजकर नेताओं को डराने की कोशिश सफल नहीं होगी और वे सिर ऊंचा करके जेल जा रहे हैं।
क्यों हो रहा है विरोध?
सीजेपी और विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सीजेपी की मांग है कि एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय हो और मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर विवाद
विवाद उस समय बढ़ा, जब दिल्ली पुलिस ने 12 अक्तूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया। अधिकारियों ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान तय किए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग की। पार्टी ने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए समय भी दिया था।
पहले भी हिरासत में लिए गए थे सीजेपी नेता
इससे पहले 10 अक्तूबर को भी सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में 11 अक्तूबर को उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया। हालांकि, अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि उन्होंने ऐसा कोई बांड नहीं भरा, जो उन्हें आगे प्रदर्शन करने से रोकता हो। इसके बाद पार्टी ने विरोध जारी रखने का फैसला किया।