फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

लाखों कैमरे तो लगाओ पर ये 5 बातें भी बताओ

Tue, 17 Feb 2015 03:38 PM IST
Updated Tue, 17 Feb 2015 03:38 PM IST
विज्ञापन
Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में

विज्ञापन
भारी जीत दर्ज कर दिल्ली में सरकार बना ली है। जनता को अब उम्मीद है कि नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनाव से पहले किए वादे पूरे करेंगे।

आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले वादा किया था कि पूरी दिल्ली में 10-15 लाख वाई-फ़ाई से जुड़े सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

बीबीसी ने पता लगाया कि यह वादा पूरा करने के लिए नई सरकार को कौन से क़दम उठाने होंगे।

1. कंट्रोल रूम

Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

वाई-फ़ाई सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए दिल्ली सरकार को चाहिए एक बड़ा कंट्रोल रूम जिसे इंटरनेट के ज़रिए कैमरों से जोड़ा जाएगा।

पूरी दिल्ली को एक ही कंट्रोल रूम में लेकर आना मुश्किल होगा। छोटे-छोटे कंट्रोल रूम बनाने होंगे जो आपस में और साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे. हर कंट्रोल रूम में टीवी मॉनिटर की ज़रूरत होगी जिस पर कैमरों की फ़ीड देखी जा सके।

पार्टी की मेनिफ़ेस्टो टीम के नेता रोशन शंकर ने बताया कि इसके लिए सरकारी दफ़्तरों मे ख़ाली पड़े कमरों और ख़ाली पड़ी ज़मीनों को इस्तेमाल में लाया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

2. निगरानी टीम

Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

फ़ीड देखने के लिए चौबीसों घंटे लोगों को तैनात करना होगा. यदि 20 कैमरों पर तीन लोगों को लगाना हो, तो दिल्ली की केजरीवाल सरकार को कम-से-कम 15 हज़ार लोगों की नियुक्ति करनी होगी।

अब यदि केवल इनकी तनख़्वाह की बात करें तो एक व्यक्ति को कम-से-कम 12 हज़ार रुपए मासिक तनख़्वाह देने पर कुल ख़र्च आएगा, 18 करोड़ रुपए।

विज्ञापन

3. रखरखाव

Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

दिल्ली सरकार का काम केवल कैमरे लगाकर चालू करने तक सीमित नहीं होगा। हर साल कई कैमरे ख़राब होंगे। मौसम की मार और कबूतरों और बंदरों से भी कैमरों को नुकसान होगा।

आईएफ़एसइसी ग्लोबल के अनुसार सौ कैमरों का डेटा कंप्रेशन के बाद एक दिन रखने के लिए दो टेट्राबाइट स्पेस चाहिए। आपको 10 लाख कैमरों से आनेवाला वीडियो रखने के लिए 20 हज़ार टेट्राबाइट जगह की दरकार होगी।

4. नए नियम

Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

साउथ एशिया मानवाधिकार डॉक्यूमेंटेशन सेंटर के निर्देशक रवि नायर कहते हैं, "भारत में न कोई डेटा सुरक्षा कानून है, न प्राइवेसी सुरक्षा क़ानून। ऐसे में कैमरे कहां लगाए जाएं, उनके ज़रिए क्या रिकॉर्ड किया जाए इस पर दिल्ली सरकार को सोचने की ज़रूरत है।"

इस तरह रिकॉर्ड वीडियो को सुबूत के बतौर पुलिस के साथ शेयर करने को लेकर भी नियम बनने ज़रूरी हैं, अन्यथा यह पुलिस राज को बढ़ावा देने वाली बात होगी।

रवि यह भी कहते हैं कि साल 2005 में दिल्ली के सरोजिनी नगर में हुए बम विस्फोटों के बाद सीसीटीवी कैमरे लगाए गए पर साल 2010 तक उन्हें ऑन ही नहीं किया गया।

2014 में भी स्थिति जस की तस थी। ऐसे में दिखावे के लिए सीसीटीवी के वायदों की बजाय बीट पेट्रोलिंग सख़्त करना अधिक कारगर साबित हो सकता है।

5. हैकर्स

Challenges before aap government in installing wi fi and cctv cameras.

साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार कैमरा पूरे दिन में बहुत सारा डेटा जेनेरेट करेगा, जिसे कहीं सर्वर पर सुरक्षित करने की ज़रूरत होगी।

इन पर हैकर्स की नज़र हो सकती है. इसलिए इसे सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज के स्तर पर, डेटा ट्रांसफर के स्तर पर सुरक्षा बेहद अहम है।

दुग्गल का कहना है कि यह पूरा डेटा भारतीय इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी क़ानून के तहत हाल ही में जारी सरकारी आदेश के तहत होगा। इसके अनुसार कोई भी सरकारी डेटा देश में स्थित सर्वर में ही रखा जाना चाहिए। ऐसे में खर्च बढ़ना लाज़मी है क्योंकि विदेशी सर्वर के मुक़ाबले भारतीय सर्वर महँगे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed