दिल्ली के सफाई कर्मचारियों पर केंद्र का रुख दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद : सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर केंद्र सरकार के रुख पर निराशा जताई है। कोर्ट ने कहा है कि सफाई कर्मचारियों के भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये जारी नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। केंद्र सरकार ने सोमवार को एक हलफनामा दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह सफाई कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए कोई रकम नहीं देगी। इस पर शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी की। अब इस मामले की सुनवाई 24 अक्तूबर को होगी। मालूम हो कि वेतन न मिलने के कारण पूर्वी दिल्ली नगर निगम के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि ऐसा कोई सांविधानिक प्रावधान या नियम नहीं है कि केंद्र एमसीडी को ऐसा कोई फंड जारी करे। उन्होंने कहा कि केंद्र के लिए यह फंड जारी करना संभव नहीं है। इस पर जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण व दुखदायी है। वहीं, दिल्ली सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि कोर्ट में किए गए वादे के मुताबिक, उसने निगम के लिए 500 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद की थी कि केंद्र नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये फंड जारी करेगा। अब केंद्र ने फंड जारी करने से मना कर दिया है। 3 अक्तूबर को पिछली सुनवाई पर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह मानवता के आधार पर सफाई कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए 500 करोड़ रुपये देने को तैयार है। इस पर कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्या वह भी इतनी ही रकम देने को तैयार है? जिस पर एडिशनल सॉलिसिटर ने कहा था कि वह इस संबंध में निर्देश लेकर आएंगे।