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वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आलोक टंडन को केंद्र ने किया डिबार

Sat, 21 Dec 2019 04:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 21 Dec 2019 04:05 AM IST
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Center debars senior IAS officer Alok Tandon
आलोक टंडन - फोटो : Social Media

केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आलोक टंडन को सचिव पद पर नियुक्ति के लिए डिबार घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखना भी टंडन का डिबार होने से नहीं रोक पाया।

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1986 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक आलोक टंडन वर्तमान में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) के साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण व पिकप के चेयरमैन हैं। 
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केंद्र सरकार ने गत 22 अक्तूबर को टंडन को प्रशासनिक  सुधार एवं लोक शिकायत विभाग का सचिव नियुक्त किया था। साथ ही पेंशन व पेंशनर कल्याण विभाग के सचिव का अतिक्ति प्रभार भी सौंपा था। 
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टंडन ने केंद्र में तैनाती पाते ही प्रदेश सरकार से 31 अक्तूबर को अपराह्न से कार्यमुक्त करने का आग्रह किया था। लेकिन, प्रदेश सरकार ने टंडन को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए कार्यमुक्त करने की जगह नई परिस्थितियों में राज्य को उनकी आवश्यकता का हवाला देते हुए उन्हें एक साल तक केंद्रीय तैनाती से छूट देने का आग्रह किया। 

इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा गया था। मगर, यह पत्र पहुंचने में देरी हुई या अन्य कोई वजह, केंद्र ने टंडन को सचिव पद पर तैनाती के लिए डिबार घोषित कर दिया है। 

जानकार बताते हैं कि केंद्र ने यदि अपने आदेश में आगे कोई बदलाव नहीं किया तो टंडन को भविष्य में केंद्र में तैनाती नहीं मिल पाएगी। टंडन का कार्यकाल सितंबर-2022 तक है।

सूत्रों का कहना है कि टंडन को एक वर्ष तक रोकने के आग्रह पर केंद्र की सहमति के बाद यहां नियमित मुख्य सचिव की तैनाती पर फैसले की योजना थी। एक वर्ष बाद उन्हें केंद्र के लिए कार्यमुक्त कर मुख्य सचिव के नए समीकरण पर निगाहें थीं। 


लेकिन सचिव पद पर तैनाती से डिबार किए जाने से टंडन अब रिटायरमेंट तक राज्य की सेवा में रहेंगे। ऐसे में मुख्य सचिव के पद पर आगे नियमित नियुक्ति का समीकरण भी उलझ गया है। बताते चलें चौथा महीना है प्रदेश में नियमित मुख्य सचिव नहीं है।

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