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जमीन खोदकर यादव सिंह के सच को तलाश रही CBI

Wed, 16 Dec 2015 04:44 PM IST
Updated Wed, 16 Dec 2015 04:44 PM IST
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CBI is investigating the Yadav singh case by digging ground

सीबीआई 2011-12 के यादव सिंह से जुड़े कथित 954 करोड़ रुपये घोटाले की जड़ खोदने में जुट गई है। जांच एजेंसी ने मंगलवार को उद्योग मार्ग पर दो जगह खुदाई कर भूमिगत तार व पाइप के सैंपल लिए। साथ ही, सेक्टर-18, 19 व 27 में जाकर भूमिगत तारों की जांच की।

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हालांकि, इसी प्रकरण की जांच करने वाली सीबीसीआईडी करीब डेढ़ साल पहले ही अपनी फाइनल रिपोर्ट में घोटाले में क्लीन चिट दे चुकी है। सीबीआई की चार सदस्यीय टीम मंगलवार सुबह करीब आठ बजे प्राधिकरण के दफ्तर पहुंची। वहां इस मामले में प्राधिकरण की तरफ से नियुक्त नोडल अफसर व मुख्य परियोजना अभियंता एके गोयल के साथ बातचीत की।

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इसके बाद करीब नौ बजे उद्योग मार्ग पर पहुंच गई। नोएडा प्राधिकरण की तरफ से उपलब्ध कराई गई मशीनरी भी मौके पर पहुंच गई। टीम ने सबसे पहले सेक्टर-दो स्थित लाल मंदिर के सामने खुदाई की। वहां से तार व पाइप के सैंपल लिए। खुदाई के दौरान पाइप कट जाने से पानी सड़क पर फैलने लगा।

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सोमवार देर रात तय की गई थी रणनीति

CBI is investigating the Yadav singh case by digging ground

जल विभाग की टीम को बुलाकर उसे रिपेयर कराया गया। इस जगह से सैंपल लेने के बाद सेक्टर-08 स्थित नर्सरी के सामने भी खुदाई की गई। यहां से बिजली के तार के सैंपल लिए। यह काम करीब एक बजे तक चला। टीम सेक्टर-19 स्थित बिजलीघर के पास, सेक्टर-27 व 18 में भी भूमिगत केबल जांचने के लिए मौके पर गई।


सूत्र बताते हैं कि मंगलवार को सैंपल लेने की रणनीति सोमवार देर रात तय हो गई थी। सीबीआई की टीम एक दिन पहले ही शाम को नोएडा आई थी। सड़क की खुदाई कर सैंपल लेने की जानकारी दे दी थी। इंजीनियरों से मौके पर मौजूद रहने को कहा गया था। खुदाई के दौरान बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। सैंपल लेने के बाद मरम्मत कर फिर से आपूर्ति शुरू की गई। प्राधिकरण या सीबीआई की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

सरकारी गवाह बनाने के लिए जांच एजेंसी प्राधिकरण के कई इंजीनियरों को अपने दफ्तर बुला चुकी है। नोएडा से तमाम कार्यों की फाइलें सीबीआई दफ्तर लेकर जाने वालों से भी सरकारी गवाह बनने को कह चुकी है। देर शाम तक सीबीआई की टीम के प्राधिकरण में रहकर इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्य जुटाने की कोशिश में लगे होने की भी जानकारी मिली है।

954 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के बॉन्ड तैयार

CBI is investigating the Yadav singh case by digging ground

2011-12 में प्राधिकरण की तरफ से 954 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के बॉन्ड तैयार हुए। इसमें से करीब 570 करोड़ रुपये सिविल और करीब 384 करोड़ रुपये के कार्य बिजली, पानी, सीवर व जन स्वास्थ्य के थे। इसी 384 में से करीब 140 करोड़ रुपये भूमिगत केबल पर खर्च हुए।

2012 में प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इन कार्यों की जांच हुई तब इस घोटाले का खुलासा हुआ। 2012 में प्राधिकरण ने इसकी एफआईआर दर्ज कराई। 27 नवंबर 2014 को आयकर विभाग ने यादव सिंह के यहां छापा मारा था।

काली कमाई उजागर होने के बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने को कहा गया। हालांकि, प्रदेश सरकार नहीं चाहती थी कि जांच आगे बढ़े, लेकिन कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। अब सीबीआई यादव सिंह की तैनाती 2002 से लेकर 2014 तक कार्यकाल के कामों की जांच कर रही है।

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