मीट के सैंपल उठाने के बाद सहमे कारोबारी, भैंसे की बिरयानी बेचने से भी बच रहे
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इसके बाद जो नमूने उठाए गए उनमें बीफ (गो मांस) की पुष्टि हो जाने के बाद बिरयानी का धंधा करने वाले बड़ी परेशानी में पड़ गए हैं। बहुत से दुकानदारों ने फिलहाल रेहड़ी लगाना ही बंद कर दिया है।
कुछ दुकानदारों ने बड़े (भैंस और कटरे) की बिरयानी बनाना ही बंद कर दिया उसकी जगह लोगों ने मुर्गे और बकरे की बिरयानी बेचनी शुरू कर दी है। इस कारोबार से जुड़े लोगों में दहशत का माहौल है।
'पुलिस को पैसा कमाने और लोगों को परेशान करने का मौका दिया'
कुछ दुकानदारों ने बताया कि अब सरकार और आयोग ने मेवात पुलिस को पैसे कमाने और लोगों को परेशान करने का एक मौका दे दिया है।
उनका कहना है कि उन्होंने धंधा इस वजह से बंद कर दिया कि कहीं कोई शरारती तत्व उनकी बिरयानी में गो मांस की बात कह कर बवाल न करवा दे।
एक दुकानदार ने बताया कि वह काफी पहले से ‘बड़े’ की बिरयानी बेचता आ रहा है। कुछ लोगों ने झूठी शिकायत करके उसे थाने में बिठा दिया और काफी परेशान किया। कोई नया बखेड़ा न हो इसलिए वह फिलहाल केवल चिकन बिरयानी ही बेच रहा है।
शरारत की आशंका से डरे लोगों ने दुकानें की बंद
रेहडी लगाने वाले रोजदार का कहना है कि वह भी पहले बड़े के मांस की बिरयानी बेचता था, लेकिन अब वह केवल मुर्गे के मांस का इस्तेमाल कर रहा है।
कई दुकानें बंद
छापेमारी और उससे भी ज्यादा किसी शरारत की आशंका से डरे लोगों ने कस्बा पुन्हाना, नगीना, पिनगवां, भादस और मालब सहित एक दर्जन गांवों में लगने वाली अपनी रेहड़ियां बंद कर दी हैं।
शुक्रवार की सुबह अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो जहां करीब दस रेहड़ियां लगती थीं वहां केवल दो ही नजर आईं। इसी तरह शाहचौखा, नूंह, रावली आदी हगोह में भी बिरयानी वाले काफी कम नजर आए।