लंबी लड़ाई के लिए तैयार नहीं हैं परिवार, घरों का बिगड़ने लगा बजट
अचानक 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने से मध्यमवर्गीय परिवारों में दिक्कत आ रही है। महीने की शुरुआत में ही मोदी के करंसी करंट ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। यह कहना है, प्रेमनगर में रहने वाले श्रीवास्तव परिवार का।
हालांकि परेशानी के बावजूद 12 लोगों के संयुक्त परिवार के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के साथ खड़े हैं। फिर श्रीवास्तव परिवार का मानना है कि समस्या अगर लंबे समय तक जारी रही तो परेशानी बढ़ना तय है।
अग्रवाल कॉलेज में राजनैतिक शास्त्र के विभागाध्यक्ष रहे स्वर्गीय डॉ. एलएन श्रीवास्तव का परिवार प्रेमनगर में रहता है। परिवार में उनकी पत्नी सुधा श्रीवास्तव, पुत्र एतेश, अर्थव, पुत्रवधु गायत्री, उनका छोटा भाई अरविंद श्रीवास्तव, उसकी पत्नी छाया, पुत्र दुष्यंत व पुत्री जीवंतिका, छोटी बहन विजय लक्ष्मी और मेरू सहित नाती एतव्य और नातिन मौसम रहते हैं। 12 सदस्यों के इस परिवार को अब सुधा श्रीवास्तव घर संभालती हैं। घर के पुरुष निजी कंपनियों में नौकरी करते हैं।
8 नवंबर को अचानक बड़े नोट बंद होने की सूचना से परिवार सकते में आ गया। परिवार के सदस्यों ने 10, 20, 50 और 1000 के नोट जुटाकर 4000 रुपये एकत्रित किए। इससे अब घर चलाया जा रहा है। दूध, अखबार, रसोई का सामान जैसी जरूरी चीजों का बंदोबस्त करने के लिए रोजाना परिवार के सदस्य बैंक की लंबी लाइन में लग रहे हैं।
संभलकर चलाना पड़ रहा घर
परिवार की मुखिया सुधा श्रीवास्तव बतातीं हैं कि नोट बंदी से फर्क पड़ा है। पहले हर महीने 12 हजार रुपये खर्च का अनुमान होता था, लेकिन इस बार 4000 रुपये में ही रसोई से लेकर तमाम खर्च एडजस्ट करने पड़ रहे हैं। रसोई का इस बार जरूरी सामान ही खरीदा गया है। दूध व सब्जी वाले का तो उधार ही चल रहा है।
मैंने 4 हजार रुपये चेंज कराए थे। इसके लिए दो घंटे लाइन में लगना पड़ा। मैं स्टूडेंट हूं। पढ़ाई छोड़कर रोजाना लाइन में लगना मुनासिब नहीं है। सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए। -जीवंतिका, सीएस छात्रा
प्रधानमंत्री मोदी के इस काम ने इतिहास रच दिया है, दिक्कतें हो रही हैं, लेकिन हम साथ हैं। आम आदमी की परेशानी को देखते हुए सरकार को कोई समाधान निकालना चाहिए। -विजयलक्ष्मी
एक तरफ नोटों की तंगी है तो दूसरी तरफ नमक, चीनी महंगे होने की अफवाह फैलाई जा रही है। प्रशासन को सख्त रुख अपनाना चाहिए नहीं तो समस्या बढ़ना तय है।
-एतेश श्रीवास्तव
इन दिनों बैंकों की लंबी लाइन में आम आदमी परेशान हो रहा है। सुकून इस बात का है कि देश हित में फैसला लिया गया है लेकिन जनता की सहूलियत के लिए बैंकों की व्यवस्था दुरुस्त हो। -दुष्यंत श्रीवास्तव
अभी तो हालात सामान्य हैं। पैसा हर किसी की जरूरत होती है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। -गायत्री