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Delhi: बायो डीकंपोजर का पाउडर करेगा पराली का निस्तारण, वैज्ञानिकों ने दो साल के प्रयास से किया तैयार
Sun, 11 Sep 2022 09:29 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 11 Sep 2022 09:29 AM IST
सार
विशेष कार्यशाला बनाकर पाउडर को तैयार किया गया है। पाउडर तैयार होने के बाद छह माह तक जीवाणुओं से भरपूर रहता है। इसके इस्तेमाल से खेत की भूमि में कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फसल कटाई के बाद दिल्ली-एनसीआर के लिए हर साल सांसों पर संकट पैदा करने वाली पराली की समस्या से रिकॉर्ड समय में निजात मिल सकेगी। इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) ने बायो डीकंपोजर का पाउडर तैयार करने में सफलता हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने दो साल के प्रयास से तैयार किया है।
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यह रिकॉर्ड 18 से 20 दिन में खेत से पराली के अवशेषों को समाप्त करने में सक्षम है। पायलट स्तर पर सफलता के बाद 30 सितंबर को अमृतसर से इसका व्यावहारिक प्रयोग शुरू होगा। इस साल आईसीएआर चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश में पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर पराली निस्तारण के लिए मुफ्त उपलब्ध कराएगा। इसके प्रयोग से जहां पूर्व में कैप्सूल का घोल बनाने मेें लगने वाले समय में कमी आएगी। वहीं खेत में पराली निस्तारण में लगने वाले 15 दिन में भी कमी आएगी।
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जमीन में बढ़ेगी कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा
वैज्ञानिक डॉ. लवलीन शुक्ला ने कहा कि दो साल तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व उत्तर प्रदेश तक फसल अवशेषों के साथ विभिन्न प्रयोग किए गए। विशेष कार्यशाला बनाकर पाउडर को तैयार किया गया। पाउडर तैयार होने के बाद छह माह तक जीवाणुओं से भरपूर रहता है। इसके इस्तेमाल से खेत की भूमि में कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ेगी।
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नौ लाइसेंसी फर्मों को दिया जाएगा उत्पादन का अधिकार
पाउडर को वाणिज्यिक उत्पादन का अधिकार वाले 9 लाइसेंसी फर्मों को दिया जाएगा। वहीं बिक्री के लिए बाजार में लाने से पहले देशभर में साढ़े पांच हजार एकड़ भूमि पर इस साल मुफ्त प्रयोग करेंगे। यह भूमि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश और हरियाणा में धान के अवशेष वाले खेतों की होगी, जहां चावल का उत्पादन होता है। इसकी कीमत पर करीब 100 रुपये प्रति पैकेट या उससे कम होगी।