बिरयानी में बीफ पर बवाल, चाय की दुकान से सियासी गलियारों तक गर्माया मुद्दा
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मेवात से पिछले दिनों लिए गए बिरयानी के सैंपलों में बीफ मिलने से मेवात में बड़ा बवाल खड़ा हो रहा है। जो बिरयानी में बीफ बेचते हैं, उनके खिलाफ कार्यवाई करने के लिए भी कहा जा रहा है, तो कुछ लोग इस मामले को धार्मिक रंग देकर अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास करने में लगे हैं।
वहीं मेवात का आमजन सिर्फ इतना चाहता हैं कि जो आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो और कोई इस तरह की बात खड़ी न हो, जिससे मेवात के आपसी भाईचारे को कोई आंच आए।
लेकिन फिलहाल चाय की दुकान से लेकर राजनीतिक गलियारों में सिर्फ बिरयानी में बीफ का मुद्दा सबसे गर्म मुद्दा बनकर उभर रहा हैं। वहीं सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर जबरदस्त तरीके से विचारों का आदान-प्रदान किया जा रहा हैं।
वकील जाएंगे हाई कोर्ट
मेवात के कुछ वकीलों ने बीफ मामले को लेकर प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। पूर्व बार प्रधान ताहिर रुपड़िया व वरिष्ठ अधिवक्ता एमयू हसन ने कहा कि गो-सेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला इस मुद्दे से सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं।
एमयू हसन ने कहा कि जिस लैब में ये टेस्ट हुआ हैं वह लैब सिर्फ गुणवत्ता की जांच करती हैं, ना कि यह मांस किसका हैं इसकी जांच। सरकार बिरयानी मुद्दे को तूल देकर ताबड़ू मामले से जनता का ध्यान हटाना चाहती हैं। मेवात के आपसी भाईचारे को तोड़ने की साजिश सरकार ने रची हैं।
'न हो आपसी भाईचारे को नुकसान, न पहुंचे भावनाओं को चोट'
मेवात के हजारों लोग बिरयानी के माध्यम से अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं, सरकार उन्हें बेरोजगार करना चाहती हैं। इस मुद्दे को लेकर वे हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ पीआईएल दाखिल करेंगे।
बार का इससे कोई सरोकार नहीं
नूंह जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट आबिद हुसैन ने कहा कि बिरयानी मुद्दे से जिला बार का कोई लेना-देना नहीं हैं। सरकार ने सैंपलों की जांच कराई हैं और यदि वे सकारात्मक मिले हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जिला बार ऐसे किसी मामले में कतई साथ नहीं देगी, जिससे आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचे और हिंदू भाईयों की भावनाएं आहत हों।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष नूरूद्दीन नूर ने कहा कि मेवात में गाय पैदा नहीं होती, बल्कि दूसरे जिलों से यहां आती हैं। जिससे स्पष्ट हैं कि दूसरे जिलों के लोग भी इसमें बराबर के भागीदार हैं और सरकार को सबसे पहले ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
अपराधियों पर कार्रवाई नहीं
मेवात में कई बड़े हत्याकांड, गैंगरेप, लूट, डकैती आदि की घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2016 में अब तक हत्या के 20, जान से मारने के प्रयास के 15, बलात्कार के 31, डकैती के 14, लूट के 5 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
एडवोकेट नूरूद्दीन नूर ने कहा कि जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले अपराधियों पर न तो पुलिस और न ही सरकार सख्त रवैया दिखा रही हैं, बल्कि बिरयानी बेचकर परिवार चलाने वालों को परेशान कर मेवात को बीफ के नाम पर बदनाम करने की साजिश रच रही हैं।
मेवात में पहले भी गोकशी व तस्करी करने वालों के खिलाफ पंचायत की गई हैं, जुर्माना किया गया हैं, हुक्का पानी बंद किया गया हैं और अब भी कोई ऐसा करता हैं तो मेवात की 36 बिरादरी ऐसे लोगों का बहिष्कार करेंगी।