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बीबीए के छात्र ने कार से 12वीं के विद्यार्थी को रौंदा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 24 Feb 2015 12:00 AM IST
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नोएडा के एक यूनिवर्सिटी के बीबीए छात्र ने स्कोडा कार से 12वीं के छात्र को उड़ा दिया। घायल को गंभीर अवस्था में एक्सप्रेसवे स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस गंभीर मामले में पुलिस ने छात्र को हिरासत में लेकर स्कोडा कार को जब्त तो कर लिया, मगर मृतक के परिजनों को आरोपी के परिजनों ने 10 लाख रुपये दे दिए। पुलिस ने समझौतानामा लिखवाने के बाद छात्र को छोड़ दिया।
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पुलिस के अनुसार, शाहपुर गांव निवासी जितेंद्र चौहान (18) 12वीं का छात्र था। वह सोमवार सुबह 10 बजे बाइक से चारा लेकर घर जा रहा था। गढ़ी शाहपुर के पास तेज रफ्तार स्कोडा कार लेकर एक यूनिवर्सिटी का बीबीए का छात्र आ रहा था। बताया जा रहा है कि कार की स्पीड 120 से 140 किमी. प्रति घंटे थी। उसने अपनी कार से जितेंद्र को उड़ा दिया, जिससे जितेंद्र कई फीट उछल कर नीचे सड़क पर गिर पड़ा।
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लोगों ने फौरन जितेंद्र को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस आरोपी दिल्ली निवासी बीबीए के छात्र को हिरासत में लेकर एक्सप्रेसवे थाने ले आई और स्कोडा कार को भी कब्जे में ले लिया। थाना प्रभारी पंकज पंत का कहना है कि आरोपी छात्र व मृतक के परिजनों के बीच समझौतानामा हुआ, जिसमें लिखा गया है कि अचानक भैंस आ जाने से हादसा हो गया और दोनों ने बतौर समझौता लिखा है कि किसी को मामले में कार्रवाई नहीं चाहिए। ऐसे में आरोपी छात्र को छोड़ दिया गया है। वहीं, स्थानीय सपा नेता अशोक चौहान ने बताया कि आरोपी छात्र के परिजनों ने पांच लाख कैश व पांच लाख का चेक मृतक के परिजनों को सौंप दिया है।
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कई घंटे चला अस्पताल में हंगामा
गांव वालों का आरोप है कि जितेंद्र की मौत हो जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उसके परिजनों से इलाज के नाम पर ढाई लाख रुपये की मांग की। हालांकि, उसे एक घंटे तक अस्पताल में रखा गया जबकि मौत हो चुकी थी। सपा नेता अशोक चौहान ने बताया कि गांव के लोगों ने अस्पताल में घंटों प्रदर्शन किया। पुलिस के आने के बाद मामला शांत हो पाया। उनका आरोप है कि अस्पताल में मौत होने के बाद भी लोगों से इलाज के नाम पर जबरन रुपये लिए जाते हैं।
...तो अमीर छात्र की कितनी कीमत लगाई जाती
सरेआम बीबीए के छात्र ने स्कोडा कार से 12 वीं के गरीब छात्र को उड़ा दिया। कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने आरोपी छात्र को हिरासत में भी ले लिया था। उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होती वह जेल भेजा जाता, मगर तब तक गरीब की कीमत लग चुकी थी। सवाल यह है कि अगर इसी तरह कोई अमीर घर का बच्चा मरता तो उसकी कीमत कितनी लगाई जाती। बड़ी आसानी से रुपये अदा कर आरोपी छात्र को परिजन थाने से छुड़ाकर ले गए।
माता-पिता को रखनी चाहिए बच्चों पर नजर
जिस युवक ने 12वीं के छात्र पर कार चढ़ा दी, वह दिल्ली से आता था। उसके माता-पिता ने कभी यह नहीं सोचा कि इतनी बड़ी कार उसे वह क्यों दे रहे हैं। पैरेंट्स अपने बच्चों पर नकेल नहीं कसते हैं उसका खामियाजा दूसरों को उठाना पड़ता है।