एसएसपी ऑफिस के सामने दादागिरी, कटे दो पुलिसवालों के चालान
गाजियाबाद के एसएसपी आफिस के सामने ही पुलिसकर्मियोंं का चालान काटने वाले तीन लोगों को कविनगर पुलिस ने धोखाधड़ी के केस में गिरफ्तार किया है। खुद को आजाद पुलिस बताने वाले यह तीनों लोग ऐसे पुलिसकर्मियों का चालान कर रहे थे, जो टोपी नहीं लगाए थे और उनके हाथों में डंडा भी नहीं था।
रोचक बात है कि दो पुलिसकर्मियों ने उन्हें 500-500 रुपये देकर चालान भुगत भी लिया। एक सिपाही ने उनका विरोध किया और 100 नंबर पर सूचना दे दी। इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस तीनों को पकड़कर थाने ले गई।
घटना शुक्रवार दोपहर की है। खुद को 'आजाद पुलिस' का सिपाही बताकर तीन व्यक्ति एसएसपी आफिस के सामने पहुंचे। तीनों के पास आजाद पुलिस के नाम से छपवाई गई चालान बुक भी थी। इनमें से खुद को आजाद पुलिस का संस्थापक बताने वाले ब्रहमपाल ने एसएसपी आफिस के बाहर दो सिपाहियों को रोककर बताया कि उनके सिर पर टोपी नहीं है।
यह मामला अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है
यह मामला अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसके अलावा वह डंडा भी नहीं लिए हुए हैं, ऐसे में उनका चालान कटेगा। इसके साथ ही ब्रहमपाल ने दोनों सिपाहियों के चालान काट दिए। वर्दी पहने आजाद पुलिस के तीन कथित अफसरों और चालान की कार्रवाई से सकपकाए दोनों सिपाही चुपचाप 500-500 रुपये का जुर्माना अदा करके चलते बने।
इसके बाद तीन अन्य सिपाहियों को भी इन लोगों ने रोक लिया। इनमें से दो सिपाहियों ने चालान यह कहकर अपनी जेल में रख लिया कि वह बाद मेंं इसका भुगतान कर देंगे, मगर सुभाषचंद नामक एक सिपाही तीनों से भिड़ गया।
शक होने पर सुभाष ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद कविनगर पुलिस मौके पर पहुंची। पूछताछ हुई तो आरोपियों की कारस्तानी का खुलासा हुआ। इसके बाद पुलिस तीनों को पकड़कर कविनगर थाने ले गई।
कई साल से आजाद पुलिस गाजियाबाद का प्रचार कर रहा है
कविनगर इंस्पेक्टर अशोक सिसोदिया ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में ब्रहमपाल निवासी नंदग्राम, मनोज निवासी माट मथुरा और मनीष निवासी जालंंधर है। तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
आरोपी ब्रहमपाल ने बताया कि वह पिछले कई साल से रिक्शे पर आजाद पुलिस गाजियाबाद का प्रचार कर रहा है। उसका कहना है कि वह अपने 'आजाद पुलिस' नामक संगठन के द्वारा ऐसे पुलिसकर्मियों का चालान कर रहे थे, जो बिना टोपी और डंडे के होते हैं। उनका संगठन सिर्फ पुलिसकर्मियों का ही चालान करता है।
चालान बुक पर लिखे थे नियम
- तीनों आरोपियों द्वारा काटे जा रहे चालान बुक की प्रत्येक रसीद पर नियम लिखे थे। इसमें यह लिखवाया गया है कि जो भी पुलिसकर्मी टोपी और डंडे के साथ नहीं होगा, उसका चालान होगा।
- चालान के आधे पैसे सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से यूपी पुलिस के कोष तक जाएंगे। बाकी के आधे पैसे आजाद पुलिस गाजियाबाद अपने पास रखेगी।
- इन पैसों से पुलिसकर्मियों के लिए टोपी और डंडे खरीदे जाएंगे और बाद में उन्हें वितरित किए जाएंगे।
पुलिस गहनता से कर रही है मामले की जांच
सीओ सेकेंड ने बताया कि मथुरा कांड का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव भी कुछ ऐसा ही ग्रुप चलाता था। उनका कहना है कि पकड़ा गया एक आरोपी मनोज मथुरा का रहने वाला है। कहीं वह उस गु्रप का सदस्य तो नहीं है, इस मामले की कविनगर पुलिस गहनता से जांच कर रही है।