कांग्रेस के लिए खतरा हैं ये चुनाव परिणाम!
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हरियाणा-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणामों से दिल्ली में कांग्रेस के नेता सहम गए हैं। एनसीआर में गुड़गांव व फरीदाबाद की ज्यादातर सीटों पर भाजपा ने बाजी मारी है। इतना ही नहीं राजनीतिक विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि जहां शहरी मतदाता ज्यादा हैं, वहां भाजपा को वोट मिले हैं।
ऐसे में दिल्ली के चुनाव में जाने की संभावना ज्यादा बन रही है। यहां तक कहा जा रहा है कि एक सप्ताह में दिल्ली में विधानसभा भंग करने की सिफारिश सामने आ सकती है।
वहीं, दिल्ली की आठ सीटों पर जीते कांग्रेस विधायक और नेताओं में भाजपा लहर का डर दिखने लगा है। दिल्ली विधानसभा और लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद हरियाणा चुनाव में हार को कांग्रेस प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अभी दिल्ली के चुनाव प्रभारी डॉ. शकील अहमद हैं जो हरियाणा की अगुवाई भी बतौर इंचार्ज वही कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं सोमवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में राज्यों के प्रभारी व महासचिवों की बैठक होनी है जिसमें यह मुद्दा भी सामने आने की संभावना है। राजधानी में 17 फरवरी से राष्ट्रपति शासन है। तब से आम आदमी पार्टी व कांग्रेस कई बार विधानसभा भंग करके चुनाव कराने की मांग कर चुकी है।
कांग्रेस दफ्तर पर मायूसी, नेता-कार्यकर्ता नहीं दिखे
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय 24 अकबर रोड पर रविवार सुबह सेे चुनाव परिणाम के रुझान आने के साथ ही मायूसी शुरू हो गई थी।
शुरुआत में जगदीश शर्मा की अगुवाई में कुछ कार्यकर्ता प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने की मांग करने जरूर एआईसीसी दफ्तर पर पहुंचे। इसके अलावा जिस समय भाजपा दफ्तर पर दिवाली मन रही थी, फूल बरस रहे थे, उस समय कांग्रेस मुख्यालय पर बेरिकेट लगे थे और सुरक्षाकर्मी के अलावा कोई नेता या कार्यकर्ता दिखाई नहीं दे रहा था।
हर राज्य की होती है अलग-अलग स्थिति
महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव परिणाम को दिल्ली से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। हर राज्य के अलग-अलग हालात होते हैं। महाराष्ट्र में 15 साल तो हरियाणा में 10 साल से कांग्रेस सत्ता में थी। जब किसी पार्टी की लगातार सरकार रहती है तो मतदाताओं में बदलाव की इच्छा होती है। दोनों राज्यों में भाजपा की जीत मोदी लहर नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ गुस्से का परिणाम है।
- मुकेश शर्मा, मुख्य प्रवक्ता, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस