Delhi: उत्तरकाशी की टनल खोदने वाले रैट माइनर्स से केजरीवाल ने मुलाकात की, आतिशी और सौरभ भारद्वाज रहे मौजूद
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को उत्तरकाशी सुरंग बचाव में शामिल रैट माइनर्स से मुलाकात की। ये माइनर दिल्ली जल बोर्ड के लिए काम करते हैं। इस दौरान दिल्ली की मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज भी मौजूद रहे।
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उत्तरकाशी सुरंग ऑपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े श्रमवीरों से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात की। अपने आवास पर उन्होंने सभी श्रमवीरों का स्वागत और सम्मान किया। श्रमवीरों ने ऑपरेशन की चुनौतियों से उनको रूबरू कराया। इस दौरान जल मंत्री आतिशी भी मौजूद थी।
सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के प्रयास में जब अमेरिकन ऑगर मशीन फेल हो गई तो इन श्रमवीरों को दिल्ली से एयर लिफ्ट करके उत्तराखंड ले जाया गया था। उन्होंने करीब 36 घंटे तक बिना सोए काम किया।इस अवसर पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज दुनिया बहुत स्वार्थी है। इतनी स्वार्थी दुनिया के अंदर कोई किसी के बारे में नहीं सोचता है। सबसे पहले आदमी ये सोचता है कि मेरा क्या होगा? मेरे साथ कुछ हो गया तो मेरे बच्चों का क्या होगा? ऐसी दुनिया के अंदर आप जैसे लोग भी हैं। आप लोगों ने जो बहादुरी का काम किया है, उसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है।
मुलाकात के बाद दिल्ली जल मंत्री आतिशी ने प्रेस वार्ता की और उन्होंने कहा कि जिन लोगों को आप यहां देख रहे हैं, वे सालों से दिल्ली जल बोर्ड की टीम से जुड़े हैं और मैन्युअल खुदाई करते हैं। इन लोगों ने अपनी मशीनरी और मेहनत के साथ, सिल्कयारा सुरंग में फंसे हुए 41 श्रमिकों तक बोरिंग करके पाइप पहुंचाया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज पूरी टीम को सम्मानित किया।
श्रमवीरों ने चुनौतियों से कराया रूबरू
श्रमवीरों ने अरविंद केजरीवाल को सुरंग में फंसे 41 लोगों तक पहुंचने से पहले आई चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकन ऑगर मशीन बहुत ही गर्म थी। जिस रॉड को काटना था, वो भी बहुत ज्यादा गर्म था। इनके बीच इंच-इंच भर की दूरी थी। इसको काटना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था।
आगे कहा कि गर्मी से खुद को बचाते हुए हमने सारे ऑगर्स रॉड को काटा। हमने 36 घंटे तक बिना सोए, बिना झपकी लिए काम किया और आखिरकार टनल में फंसे 41 लोगों तक पहुंच गए। सुरंग का गिरा हुआ 48 मीटर का हिस्सा बहुत ही कठिन था। इस हिस्से की ड्रिलिंग पूरा करने में कई लोग असफल हो गए थे, लेकिन हमने उस बाधा को पार कर लिया।