अर्जुन ने साझा की मुश्किलें, बताया कैसे फतह की मकालू
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माउंट मकालू पर फतह करने के लिए हौसले बुलंद होने चाहिए। इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग भी जरूरी है। यह बातें बुधवार को पर्वतारोही अर्जुन वाजपेयी ने कही। सेक्टर-51, नोएडा स्थित अपने घर पर प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि चढ़ाई के लिए इस साल जनवरी से स्पेशल ट्रेनिंग की शुरूआत की थी।
जिसमें मौसम से लड़ने की तकनीक के अलावा 11-11 घंटे की कठिन प्रशिक्षण शामिल रहा। इसकी बदौलत ही चौथी बार में मिशन हासिल किया, हालांकि इस दौरान उनके दो साथी शेरपा की मौत हो गई।
अर्जुन ने बताया कि वह पहले भी तीन बार मकालू की चढ़ाई कर चुके हैं लेकिन चोटी तक नहीं पहुंच सके थे। इस बार भी कुछ ऐसी स्थिति बन रही थी कि लग रहा था वापस लौटना पड़ेगा, लेकिन मौसम की कठिनाइयों को पार करते हुए मुकाम तक पहुंचे।
कड़ी मेहनत के बाद किसी तरह चोटी तक पहुंचे
चोटी से मात्र 120 मीटर पहले की चढ़ाई बिल्कुल सीधी थी। टीम के पास रस्सी कम थी, ऐसे में कड़ी मेहनत के बाद किसी तरह चोटी तक पहुंचे। वाजपेयी ने बताया कि मकालू से लौटते वक्त अधिक परेशानी हुई। कैंप-4 तक वापस आने में करीब 6 घंटे लगे। मौसम की खराबी और हवाओं के चलते बार-बार चोटें लगती रही। अच्छी फिटनेस के बाद वह इस साल नए युवाओं के साथ 8000 मीटर की चढ़ाई कर सकते हैं।
अर्जुन ने बताया कि चढ़ाई के दौरान बेस कैंप से जो भी मौसम के बारे में अपडेट दी जाती थी, वह गलत साबित होती थी। विभाग के मुताबिक, हवा कम चलेगी तो ज्यादा चलती थी। दरअसल, मकालू एक ऐसी चोटी है जहां पल भर में ही मौसम में बदलाव आता है। ऐसे में कई बार जानकारी सटीक मिली तो कई बार काफी परेशानी भी हुई।
अर्जुन ने बताया कि मंगलवार को सम्मानित करने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कहा कि प्रदेश में कई ऐसे लोग हैं जिनमें पर्वतारोही बनने की इच्छा है, लेकिन प्रदेश में एक भी माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट नहीं है। अर्जुन ने इच्छा जताई है कि प्रदेश में इंस्टीट्यूट खोला जाए, जिसमें लोगों को ट्रेनिंग दी जाए।