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दिल्ली: राजधानी का एक्यूआई गिरा, लेकिन तीन इलाकों में प्रदूषण अधिक; जानिए कहां सबसे ज्यादा स्थिति खराब

Mon, 26 Oct 2026 11:45 AM IST
Vijay Singh Pundir ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Mon, 26 Oct 2026 11:45 AM IST
सार

दिल्ली के कई इलाकों में हवा की हालत खराब है। विवेक विहार में एक्यूआई 235, आरके पुरम में 223 और नरेला में 217 दर्ज किया गया। इन तीनों इलाकों में हवा खराब श्रेणी में रही।

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Air quality in Delhi recorded in the moderate category on Monday morning
दिल्ली वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में सोमवार सुबह हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, सुबह 7:05 बजे दिल्ली का एक्यूआई 164 दर्ज किया गया। रविवार को यह 167 था। यानी एक्यूआई में तीन अंकों की मामूली गिरावट आई है।

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हालांकि, दिल्ली के कई इलाकों में हवा की हालत खराब है। विवेक विहार में एक्यूआई 235, आरके पुरम में 223 और नरेला में 217 दर्ज किया गया। इन तीनों इलाकों में हवा खराब श्रेणी में रही।
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30 केंद्रों पर पीएम 2.5 सबसे बड़ा प्रदूषक
दिल्ली के 60 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 55 के आंकड़े उपलब्ध थे। इनमें 30 केंद्रों पर पीएम 2.5 सबसे प्रमुख प्रदूषक रहा। गौरतलब है कि पीएम 2.5 के छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, पीएम 10 में धूल और दूसरे बड़े कण शामिल होते हैं।
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वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और ईंधन जलाना प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषक जल्दी नहीं फैल पाते, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है।

सांस और दिल के मरीजों को सावधानी जरूरी
सीपीसीबी के मानकों के मुताबिक, 101 से 200 के बीच एक्यूआई मध्यम और 201 से 300 के बीच खराब श्रेणी में आता है। मध्यम श्रेणी की हवा भी फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी दे सकती है। खराब श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य पर व्यापक असर पड़ सकता है।

पीएम 2.5 और पीएम 10 हवा में मौजूद कणों के प्रमुख संकेतक हैं। पीएम 2.5 के कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। ये सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, पीएम 10 में 10 माइक्रोमीटर या इससे छोटे कण शामिल होते हैं।


21 अक्तूबर से लागू है ग्रेप का पहला चरण
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के बाद 21 अक्तूबर को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) का पहला चरण लागू किया गया था। इसके तहत होटल, रेस्तरां और खुले में खाने-पीने की जगहों पर तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक है। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी जरूरी और आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए पाबंदियां लगाई गई हैं।

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