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दिल्ली में घुट रहीं सांसें: कई इलाकों में AQI 400 पार, NCR में नोएडा सबसे प्रदूषित; फरीदाबाद की वायु सबसे साफ

Sat, 08 Nov 2025 09:47 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 08 Nov 2025 09:47 PM IST
सार

एनसीआर में दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 354 दर्ज किया गया, यह बेहद खराब श्रेणी है। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या हुई।

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Air quality in Delhi crosses 400 in several areas Noida is most polluted in NCR
दिल्ली में बढ़ा वायु प्रदूषण - फोटो : एएनआई

विस्तार

राजधानी में पहाड़ों से आ रही बर्फीली ठंडी हवाओं व पराली का धुएं ने हवा को जहरीला बना दिया है। आबोहवा में मौजूद ठंडी हवा ने प्रदूषक कणों को हवा में घोल दिया हैं। इससे लोगों की सांसें उखड़ रही हैं। ऐसे में राजधानी की फिजा में पीएम 2.5 के प्रदूषित कण जहर घोलने का काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, हवा में पराली से होने वाला प्रदूषण 30.915 रहा। इसके अलावा रविवार को 31.246 फीसदी रहने की आशंका है।

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बेहद खराब श्रेणी में हवा
वहीं, वाहन से होने वाला प्रदूषण 15.321 फीसदी रहा। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 361 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें शुक्रवार की तुलना में 39 सूचकांक की वृद्धि दर्ज की गई। सुबह की शुरुआत धुंध और हल्के कोहरे से हुई। वहीं, आसमान में कुहासे के साथ स्मॉग की चादर भी दिखाई दी। इसके चलते दृश्यता भी सही रही। ऐसे में सफदरजंग एयरपोर्ट में सुबह 6:30 बजे 900 मीटर दृश्यता दर्ज की गई, जो उसके बाद सुधरकर आठ बजे 1200 मीटर हो गई। इस दौरान लोग मास्क पहने नजर आए। साथ ही, सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

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एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे प्रदूषित
दूसरी ओर, एनसीआर में दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 354 दर्ज किया गया, यह बेहद खराब श्रेणी है। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या हुई। वहीं, गाजियाबाद में 339, ग्रेटर नोएडा में 336 और गुरुग्राम में 236 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 264 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। 

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मंगलवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान मंगलवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। सीपीसीबी के अनुसार, दिल्ली में पिछले 24 घंटों में 16 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम दिशा से हवाएं चली। इसके चलते प्रदूषण में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1500 मीटर रही। इसके अलावा वेंटिलेशन इंडेक्स 9000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा।

पीएम10 और पीएम2.5 का स्तर रहा इतना
दूसरी ओर, शाम चार बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 324.3 और पीएम2.5 की मात्रा 190.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। सीपीसीबी के अनुसार, राजधानी के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा बेहद खराब में रिकॉर्ड की गई, जबकि कुछ इलाकों में एक्यूआई मध्यम रहा। दीपावली के बाद से दिल्ली में कई इलाकों में एक्यूआई खराब और बेहद खराब श्रेणी में बना हुआ है, जबकि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-2 (ग्रेप-2) के प्रतिबंध अब भी लागू हैं। सीपीसीबी के आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार, दिल्ली में इस साल अभी तक गंभीर हवा वाला कोई दिन रिकॉर्ड नहीं किया गया है, लेकिन इस हफ्ते ऐसा होने की आशंका है। पिछली बार ऐसी रीडिंग 23 दिसंबर, 2024 को ली गई थी, जब एक्यूआई 406 रिकॉर्ड किया गया था।

दिल्ली का बीते 14 दिन का एक्यूआई
26 अक्तूबर: 321
27 अक्तूबर: 301
28 अक्तूबर: 294
29 अक्तूबर: 279
30 अक्तूबर: 373
31 अक्तूबर: 218
1 नवंबर: 303
2 नवंबर: 366
3 नवंबर: 309
4 नवंबर: 291
5 नवंबर: 202
6 नवंबर: 311
7 नवंबर: 322
8 नवंबर: 361
(स्त्रोत: सीपीसीबी)
 

इन इलाकों में इतना रहा एक्यूआई
वजीरपुर - 420
बवाना - 419
बुराड़ी क्रॉसिंग - 418
विवेक विहार - 411
नरेला-406
नेहरू नगर - 406
आईटीओ - 402
जहांगीरपुरी- 402
रोहिणी - 400
पंजाबी बाग - 398
मुंडका - 396
सोनिया विहार - 395
चांदनी चौक- 394
पटपड़गंज- 392
 

हवा को प्रदूषित करने के कारक
-कूड़े के पहाड़: गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइट से उड़ने वाली धूल वायुमंडल में तैरती रहती है।
-निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल: पूरे साल दिल्ली में निर्माण कार्य चलते रहे हैं। कुछ अधिकृत होते हैं लेकिन उससे ज्यादा अनाधिकृत निर्माण कार्य होते हैं।
-गाड़ियों से निकलता धुआं : दिल्ली में प्रतिदिन एक करोड़ दोपहिया से लेकर भारी वाहन सड़कों पर उतरते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ावा देता है।
-सड़कों और फुटपाथ पर धूल : सड़कों पर उड़ती धूल भी वायु प्रदूषण में अहम रोल अदा कर रही है। कुछ सड़कों पर मशीन से सफाई होती भी है तो फुटपाथ पर धूल जमी रहती है। -निर्माण व विध्वंस का मलबा : निर्माण कार्य व विध्वंस (सीएंडडी) से निकलने वाला मलबा सड़कों के किनारे पड़ा रहता है।
-खुले में जलता कूड़ा : राजधानी में जगह-जगह खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। इस पर पूरे साल रोक होती है। ग्रेप के दूसरे चरण के बाद भी जगह-जगह कूड़ा जलाया जा रहा है।
-औद्योगिक उत्सर्जन : औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषक वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं।
 

दिल्ली में 200 एंटी स्मॉग गन होंगी तैनात
लगातार बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए सरकार ने राजधानी की सड़कों पर बड़े पैमाने पर एंटी स्मॉग गन तैनात करने का फैसला किया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 200 ट्रक-माउंटेड एंटी स्मॉग गनों को किराये पर लेने के लिए लगभग 59 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय की मंजूरी दी है। यह एंटी स्मॉग गन फरवरी तक दो शिफ्टों में चलेंगी और राजधानी के उन इलाकों में तैनात होंगी जहां धूल प्रदूषण सबसे अधिक है।

इस संबंध में पीडब्ल्यूडी की ईस्ट (मेंटेनेंस) जोन की ओर से 6 नवंबर को आदेश जारी किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि एंटी स्मॉग गन रोजाना 8-8 घंटे की दो शिफ्टों में काम करेंगी। प्रत्येक एंटी स्मॉग गन के संचालन और किराये की औसत लागत 29,41,724 रुपये निर्धारित की गई है। इस अभियान को पॉल्यूशन कंट्रोल एंड इमरजेंसी मेजर्स (अन्य राजस्व व्यय) शीर्ष के तहत वित्तीय स्वीकृति मिली है। दिल्ली सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ इन एंटी स्मॉग गन पर पर्यावरण जागरूकता संबंधी संदेश भी प्रदर्शित किए जाएंगे। राजधानी में एंटी स्मॉग गन 2018 में लाई गईं थीं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों को लेकर सख्त निर्देश दिए थे।

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