अस्सी साल पहले फर्रुखाबाद के अहमदगंज गांव में रहने वाले एक ब्राह्मण(दीक्षित) परिवार में एक के बाद एक आठ लड़कियों की जन्म लेने से पहले ही मौत हो गई। इसके साथ ही यह अफवाह पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई कि दीक्षित परिवार शापित है और इनके घर कभी औलाद पैदा नहीं होगी।
इस डर से जब सहमी लीलावती दीक्षित जब 9वीं बार गर्भवती हुईं तो इस श्राप से मुक्त होने के लिए उन्होंने खास उपाय किया। लीलावती एक दिन में पूरी रामायण पढ़ जाती थीं और ये प्रक्रिया वह लगातार 9 दिन तक अपनाती रहीं ताकि इस बार उसकी गोद हरी हो जाए।
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baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
हुआ भी कुछ ऐसा ही। लीलावती की गोद हरी हुई और भगवान ने उन्हें इस बार बेटा दिया। दीक्षित परिवार ने बच्चे का नाम वीरेंद्र देव दीक्षित रखा। 80 साल बाद उसी अहमदगंज गांव में एक खबर आई कि दीक्षित परिवार में जन्मा वही बेटा एक ऐसा आश्रम चलाता है जिसमें लड़कियों को बंधक बनाया जाता है और उनका बलात्कार किया जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
वीरेंद्र देव दीक्षित का जन्म जिस घर में हुआ था वह मिट्टी का कच्चा मकान था। अब वह मकान ढह चुका है लेकिन अहमदगंज में ऐसा लगता है जैसे वक्त रुक सा गया है। आज भी इस गांव में स्ट्रीट लाइट मोबाइल और टेलीविजन की पहुंच नहीं है। यहां तक कि इस गांव की गलियों में स्ट्रीटलाइट भी नहीं है।
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- फोटो : कुमार संजय
1942 की सर्दियों में जन्मा वीरेंद्र देव दिक्षित पर आरोप लगा है कि उसने अपने भक्तों ठग कर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय बनाया। मालूम हो कि रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में 19 दिसंबर को छापे पड़ने के बाद में 3 जनवरी को सीबीआई ने यह केस दिल्ली पुलिस के हाथों से अपने हाथों लिया और बाद में आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की सभी चीजों को जब्त कर लिया। साथ ही दीक्षित के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया।