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खतरनाक इमारतों की सूची सार्वजनिक करे एमसीडी : सीआईसी
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वेबसाइट पर पता, नोटिस और कार्रवाई का ब्योरा उपलब्ध कराने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में जर्जर और खतरनाक इमारतों से जुड़े मामलों में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने एमसीडी को जोन-वार और वार्ड-वार सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि खतरनाक घोषित इमारतों, जारी नोटिस और निगम की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसी सूचनाओं में देरी से जान-माल के नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने एमसीडी आयुक्त को निर्देश दिया कि निगम अपनी वेबसाइट पर आसानी से खोजी जा सकने वाली व्यवस्था के तहत ऐसी इमारतों की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवहार्यता की जांच करे। इसमें इमारत का पता, उसे खतरनाक घोषित किए जाने या सर्वे की तारीख, जारी नोटिस और की गई कार्रवाई का विवरण शामिल किया जा सकता है।
मामला कुरैश नगर के वार्ड-81 से जुड़ी आरटीआई अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया। एमसीडी के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच तीन इमारतें खतरनाक पाई गईं। तीनों के संबंध में धारा 348 के तहत नोटिस जारी किए गए, लेकिन दो नोटिसों का ही रिकॉर्ड उपलब्ध मिला। धारा 349 के तहत भी नोटिस जारी हुए। इसके अलावा खतरनाक या मरम्मत योग्य इमारतों को लेकर 17 एडवाइजरी जारी की गईं।
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फटकार पर एमसीडी ने कहा-अनजाने में हुई चूक
आरटीआई सूचना देने में देरी पर आयोग ने एमसीडी को फटकार लगाई। जानकारी सीआईसी में मामला पहुंचने और सुनवाई का नोटिस जारी होने के बाद दी गई। एमसीडी ने देरी को ‘अनजाने में हुई चूक’ बताते हुए बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निष्क्रियता, लापरवाही या विभागीय समन्वय की कमी से सूचना पाने का अधिकार अप्रभावी नहीं बनाया जा सकता।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में जर्जर और खतरनाक इमारतों से जुड़े मामलों में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने एमसीडी को जोन-वार और वार्ड-वार सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि खतरनाक घोषित इमारतों, जारी नोटिस और निगम की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसी सूचनाओं में देरी से जान-माल के नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने एमसीडी आयुक्त को निर्देश दिया कि निगम अपनी वेबसाइट पर आसानी से खोजी जा सकने वाली व्यवस्था के तहत ऐसी इमारतों की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवहार्यता की जांच करे। इसमें इमारत का पता, उसे खतरनाक घोषित किए जाने या सर्वे की तारीख, जारी नोटिस और की गई कार्रवाई का विवरण शामिल किया जा सकता है।
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मामला कुरैश नगर के वार्ड-81 से जुड़ी आरटीआई अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया। एमसीडी के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच तीन इमारतें खतरनाक पाई गईं। तीनों के संबंध में धारा 348 के तहत नोटिस जारी किए गए, लेकिन दो नोटिसों का ही रिकॉर्ड उपलब्ध मिला। धारा 349 के तहत भी नोटिस जारी हुए। इसके अलावा खतरनाक या मरम्मत योग्य इमारतों को लेकर 17 एडवाइजरी जारी की गईं।
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फटकार पर एमसीडी ने कहा-अनजाने में हुई चूक
आरटीआई सूचना देने में देरी पर आयोग ने एमसीडी को फटकार लगाई। जानकारी सीआईसी में मामला पहुंचने और सुनवाई का नोटिस जारी होने के बाद दी गई। एमसीडी ने देरी को ‘अनजाने में हुई चूक’ बताते हुए बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक निष्क्रियता, लापरवाही या विभागीय समन्वय की कमी से सूचना पाने का अधिकार अप्रभावी नहीं बनाया जा सकता।