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'दाखिला किस आधार पर हो, प्रबंधन का है अधिकार'

Fri, 29 Jan 2016 10:55 AM IST
Updated Fri, 29 Jan 2016 10:55 AM IST
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निजी स्कूलों ने सरकार के उस फैसले को गलत ठहराया है जिसमें प्रबंधन कोटा खत्म कर दिया गया था। हाईकोर्ट के समक्ष उन्होंने तर्क रखा कि सरकार के पास निजी स्कूलों के लिए इस तरह का आदेश पारित करने का अधिकार ही नहीं है। गांगुली कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है की निजी स्कूलों की स्वायत्तता को सरकार किस आधार पर खत्म कर सकती है।

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न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि निजी स्कूल में दाखिला किस आधार पर हो, इस बात का पूरा अधिकार प्रबंधन रखता है।

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सुनवाई के दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया व आप नेता राघव चड्डा भी उपस्थित थे। समयाभाव के कारण अदालत ने सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। स्कूलों के अधिवक्ता ने कहा कि वे सोमवार को पक्ष रखेंगे। अदालत ने कहा कि कल दिल्ली सरकार अपना पक्ष रखे ताकि वे मामले में जल्द निर्णय दे सकें।

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सरकार ने प्रबंधन कोटे को 20 फीसदी तक रखा था

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निजी स्कूलों के अधिवक्ता ने कहा कि वर्ष 2007 में दिल्ली सरकार ने स्वयं अधिसूचना जारी कर स्कूलों के प्रबंधन कोटे को 20 फीसदी तक रखा था। ऐसे में शिक्षा निदेशालय द्वारा गत 6 जनवरी को जारी आदेश को रद्द किया जाए।


इससे पूर्व दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने तर्क रखा था कि प्रबंधन कोटे में पारदर्शिता नहीं है। कोटे के नाम पर बच्चों से भेदभाव किया जा रहा है। यही कारण है की इसे खत्म किया गया है।

अधिवक्ता ने कहा कि अदालत स्पष्ट कर चुकी है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं किया जा सकता। सभी शिक्षा संस्थानों को इसे समान रूप से लागू करना होगा चाहे उसे सहायता मिल रही है या नहीं।

सरकार का फैसला था कोई भी स्कूल कैपिटेशन फीस नहीं ले सकता

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अदालत ने 28 नवंबर 2014 को अपने एक फैसले में कहा था कि कोई भी स्कूल कैपिटेशन फीस नहीं ले सकता। यदि वह ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।


पेश मामले में राजधानी के करीब 400 निजी स्कूलों की एक्शन कमेटी व फोरम फॉर प्रमोशन ऑफ क्वालिटी एजूकेशन फॉर ऑल ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।

दोनों ने अपनी-अपनी याचिकाओं में शिक्षा निदेशालय के उस आदेश को रद्द करने का आग्रह किया है जिसमें प्रबंधन कोटा को खत्म किया गया है।

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