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Delhi: 964 करोड़ की परियोजना 1635 करोड़ पहुंची, बारापुला बना घाटे का कॉरिडोर, सरकार को चुकाने पड़े 266 करोड़

Tue, 06 Jan 2026 06:10 AM IST
Digvijay Singh धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 06 Jan 2026 06:10 AM IST
सार

बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-तीन परियोजना अब केवल एक अधूरी सड़क परियोजना नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के लिए प्रशासनिक लापरवाही से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान की केस स्टडी बन चुकी है।

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A project initially costing 964 crore has now reached 1635 crore the Barapullah corridor has become a loss-mak
बारापुला एलिवेटेड परियोजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-तीन परियोजना अब केवल एक अधूरी सड़क परियोजना नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के लिए प्रशासनिक लापरवाही से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान की केस स्टडी बन चुकी है। लगभग एक दशक तक खिंची इस परियोजना ने सरकारी तंत्र की उन कमजोरियों को उजागर किया है, जिनकी वजह से सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा।

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मयूर विहार फेज-एक से सराय काले खां तक बनने वाली साढ़े तीन किलोमीटर लंबी इस परियोजना की शुरुआती लागत 964 करोड़ रुपये तय की गई थी, लेकिन समय पर फैसले न होने, जमीन अधिग्रहण की तैयारी के बिना काम शुरू करने और ठेकेदार से उपजे विवादों ने इसकी लागत को बढ़ाकर 1635.03 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। यानी लगभग 671 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ा।
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बारापुला फेज-तीन की सबसे बड़ी खामी यह रही कि वर्ष 2015 में परियोजना का काम पूरी जमीन उपलब्ध हुए बिना शुरू कर दिया गया। इसके चलते बार-बार काम रुका, निर्माण कार्यक्रम बदला गया और ठेकेदार कंपनी के साथ भुगतान को लेकर विवाद गहराते चले गए। अंततः मामला मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) तक पहुंचा, जहां सरकार को उल्टे ठेकेदार कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को करीब 266 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर जमीन, पर्यावरण अनुमति और तकनीकी बाधाओं का समाधान कर लिया गया होता, तो न केवल समय बचता बल्कि यह भारी आर्थिक नुकसान भी टाला जा सकता था। इस परियोजना में देरी का असर सिर्फ ट्रैफिक तक सीमित नहीं रहा। बारापुला कॉरिडोर को पूर्वी दिल्ली और गाजियाबाद से दक्षिणी दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक तेज कनेक्टिविटी के लिए अहम है। फेज-तीन पूरा न होने से पहले से बने फेज-एक और फेज-टू का पूरा लाभ भी नहीं मिल पा रहा।
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इस साल जुलाई तक पूरा होगा निर्माण कार्य
परियोजना का करीब 95 फीसद काम पूरा हो चुका है और केवल 500 मीटर हिस्से में 10 पिलर व 14 स्पैन का निर्माण बाकी है, सरकार का दावा है कि 31 जुलाई तक काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मयूर विहार से एम्स तक करीब साढ़े 9 किलोमीटर लंबा सिग्नल-फ्री कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। बारापुला फेज-तीन से मिले अनुभव के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किए हैं। अब किसी भी बड़ी परियोजना के लिए टेंडर जारी करने से पहले फिजिबिलिटी स्टडी अनिवार्य कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में बिना जमीन और स्पष्ट अनुमतियों के किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। परियोजना में हुई देरी और कथित अनियमितताओं की जांच फिलहाल भ्रष्टाचार निरोधक शाखा कर रही है। जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने बिना पर्याप्त तैयारी के परियोजना शुरू कराई।


पूवी दिल्ली गाजियाबाद और नोएडा वालों को मिलेगा लाभ
बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-तीन के पूरा होने से पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से दक्षिणी दिल्ली की ओर रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। मयूर विहार से सराय काले खां और आगे एम्स तक सिग्नल-फ्री आवाजाही संभव होगी, जिससे यात्रा समय में 20 से 30 मिनट की बचत होगी। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जाने वाले यात्रियों, मरीजों, दफ्तर जाने वालों को तेज व बाधा मुक्त मार्ग मिलेगा। इससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और दक्षिण व पूर्वी दिल्ली के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

परियोजना पर एक नजर
--परियोजना का शिलान्यास: 23 सितंबर 2014
--निर्माण कार्य शुरू: वर्ष 2015
--परियोजना की लंबाई: लगभग 3.5 किलोमीटर
--मार्ग: मयूर विहार फेज-एक से सराय काले खां
--शुरुआती लागत: 964 करोड़ रुपये
--संशोधित लागत: 1635.03 करोड़ रुपये

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