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इस साल 9 लाख क्लासरूम डिजिटल बोर्ड से जुड़ेंगे, प्रकाश जावडेकर की घोषणा
Thu, 21 Feb 2019 12:04 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:04 AM IST
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Prakash Javadekar
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2019 से नौ लाख क्लासरूम डिजिटल बोर्ड से जुड़ जाएंगे। केंद्र सरकार अप्रैल सत्र से स्कूलों को ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड से जोड़ने जा रही है। इसमें डेढ़ लाख सरकारी स्कूलों के सात लाख क्लास रूम और 300 विश्वविद्यालयों के दो लाख क्लासरूम डिजिटल होंगे। नौंवी, दसवीं, 11वीं,12वीं कक्षा, स्नातक व स्नातकोत्तर प्रोग्राम के छात्र डिजिटल बोर्ड से पढ़ेंगे। योजना 2022 तक पूरी होगी, जिसमें सात से दस हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड शुरू करने की घोषणा की। उनके मुताबिक, इस योजना में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार खर्च करेगी। प्रोफेसर झुनझुनवाला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डिजिटल बोर्ड योजना लागू होगी। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई करवाने की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
जावडेकर के मुताबिक, 70 साल पहले ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड हुआ था और 2019 में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड होगा। 2022 में आजादी के 75 साल होने पर छात्र तकनीक से पढ़ाई करते नजर आएंगे। केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, राज्य शिक्षा बोर्ड के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल होंगे। जल्द ही ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड का पोटर्ल भी शुरू होगा।
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बस्ते का बोझ भी होगा कम
जावडेकर के मुताबिक, डिजिटल बोर्ड से स्कूल बैग का बोझ भी कम होगा। क्योंकि डिजिटल क्लासरूम होने से किताबों की जरूरत नहीं रहेगी। शुरुआत में संबंधित कक्षा की किताबों को डिजिटल बोर्ड से जोड़ा जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ छोटे-छोटे लैक्चर तैयार करेंगे। इसमें फिल्म, खेल -खेल, टयूटोरियल, लैक्चर आदि शामिल हैं। मंत्रालय की टीम स्कूलों का दौरा करके डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई की जांच भी करेगी। स्कूलों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा, ताकि छोटे शहर या कस्बे में बैठा छात्र बड़े स्कूलों के विषय विशेषज्ञ से सीधे अपने सवाल पूछ सके।
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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बुधवार को ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड शुरू करने की घोषणा की। उनके मुताबिक, इस योजना में 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी पैसा राज्य सरकार खर्च करेगी। प्रोफेसर झुनझुनवाला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डिजिटल बोर्ड योजना लागू होगी। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई करवाने की बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
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जावडेकर के मुताबिक, 70 साल पहले ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड हुआ था और 2019 में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड होगा। 2022 में आजादी के 75 साल होने पर छात्र तकनीक से पढ़ाई करते नजर आएंगे। केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय, राज्य शिक्षा बोर्ड के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल शामिल होंगे। जल्द ही ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड का पोटर्ल भी शुरू होगा।
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बस्ते का बोझ भी होगा कम
जावडेकर के मुताबिक, डिजिटल बोर्ड से स्कूल बैग का बोझ भी कम होगा। क्योंकि डिजिटल क्लासरूम होने से किताबों की जरूरत नहीं रहेगी। शुरुआत में संबंधित कक्षा की किताबों को डिजिटल बोर्ड से जोड़ा जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ छोटे-छोटे लैक्चर तैयार करेंगे। इसमें फिल्म, खेल -खेल, टयूटोरियल, लैक्चर आदि शामिल हैं। मंत्रालय की टीम स्कूलों का दौरा करके डिजिटल बोर्ड से पढ़ाई की जांच भी करेगी। स्कूलों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा, ताकि छोटे शहर या कस्बे में बैठा छात्र बड़े स्कूलों के विषय विशेषज्ञ से सीधे अपने सवाल पूछ सके।