फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   65 per cent women in Myth to epilepsy.

महिलाओं में इस 'बीमारी' को लेकर है गलतफहमी

Wed, 12 Nov 2014 11:40 AM IST
Updated Wed, 12 Nov 2014 11:40 AM IST
विज्ञापन
65 per cent women in Myth to epilepsy.

मिर्गी के 80 फीसदी मामलों की रोकथाम संभव है। यदि सही समय पर बीमारी का पता लग जाए और सही इलाज मिले तो यह एक आम बीमारी की तरह है। इलाज में देरी की वजह से मिर्गी के मरीज विकलांगता की श्रेणी में आ जाते हैं, जबकि मिर्गी के मरीजों को सरकार विकलांगता की श्रेणी में नहीं रखती है। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से डेढ़ वर्ष तक मिर्गी के मरीजों पर किए गए अध्ययन के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें यह बातें कही गई है।

विज्ञापन


अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि जनवरी 2010 से जून 2011 तक एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग में आने वाले 208 मिर्गी के मरीजों का अध्ययन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि मिर्गी के 23.08 फीसदी मरीज गंभीर अशक्तता की श्रेणी में हैं जबकि 46.62 फीसदी मामूली रूप से अशक्त होते हैं, लेकिन सरकार अभी मिर्गी के मरीजों को अशक्त की श्रेणी में नहीं रखती है।
विज्ञापन


अध्ययन में यह भी देखा गया कि मिर्गी से पीड़ित मरीजों में बीमारी से ज्यादा मिथ हैं। मरीजों से पूछे गए सवालों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि 65 फीसदी महिला मरीजों में जबकि 35 फीसदी पुरुष मरीजों में मिथ था। यही नहीं अध्ययन में यह भी सामने आया है कि मिर्गी के 78 फीसदी मरीजों को इलाज ही नहीं मिल पाता। केरल एक ऐसा राज्य है जहां बीमारी और इलाज का गैप महज 38 फीसदी का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. मंजरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1.9 फीसदी जबकि शहरी क्षेत्र में एक फीसदी आबादी मिर्गी से पीड़ित है। एक अनुमान के मुताबिक देश भर में करीब एक करोड़ 20 लाख लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि यह धारणा गलत है कि महिलाओं में मिर्गी ज्यादा होती है। उन्होंने यह भी बताया कि अध्ययन में यह स्पष्ट है कि मिर्गी से पीड़ित 90 फीसदी गर्भवती आम महिला की तरह बच्चे को जन्म देती हैं।

ये हैं मिर्गी के बारे में कुछ खास-खास बातें

65 per cent women in Myth to epilepsy.

क्या है मिर्गी
मांसपेशियों पर हमारे मस्तिष्क का नियंत्रण रहता है। मगर चोट लगने, संक्रमण, रोग विशेष या किसी अन्य कारण से मस्तिष्क में विकार उत्पन्न हो जाता है। इससे मस्तिष्क से प्रसारित होने वाले संदेश गड़बड़ा जाते हैं। इसकी वजह से मांसपेशियों की गतिविधियों में विकार आ जाता है और वे झटके देने लगती हैं, ऐंठ जाती हैं या मरोड़ खाने लगाती हैं। इसे ही मिरगी का दौरा पड़ना कहा जाता है। अधिकतर लोगों में भ्रम होता है कि यह रोग आनुवंशिक होता है, पर सिर्फ एक प्रतिशत लोगों में ही ये रोग आनुवंशिक होता है।

लक्षण
सारा शरीर तन जाता है। यह अवस्था 30 सेकंड से अधिक नहीं होती, मगर इस दौरान मरीज की सांस रुक सकती है। वह अपनी जीभ को दांतों से चबा सकता है। कई मरीजों को कपड़ों में पेशाब या पाखाना भी हो जाता है।

रोग के कारण
मस्तिष्क में रक्तस्राव होना या खून का थक्का जम जाना (स्ट्रोक),
सिर में चोट लगना,
बहुत तेज बुखार,
मस्तिष्क संक्रमण
खसरा या गलसूजा या गर्भावस्था की जटिलताओं की वजह से।
देश में एक करोड़ रोगी

होता है पूर्वाभास
झटकों का दौरा शुरू होने का पूर्वाभास मरीज को हो जाता है। या तो आंखों के सामने तेज रोशनी चमकती दिखाई देती है या रंगों की छटा नजर आती हैं। जब दौरा पड़े तो बरतें सावधानियां।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed