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नई दिल्ली विधानसभा सीट: केजरीवाल के खिलाफ पर्चा नहीं भर पाने वाले 11 उम्मीदवारों की याचिका रद्द
Tue, 28 Jan 2020 02:47 PM IST
Vikas Kumar
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 28 Jan 2020 02:47 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
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नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ पर्चा न भर पाने वाले 11 उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने उन लोगों की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है, जिन्होंने चुनाव आयोग द्वारा कुछ उम्मीदवारों के पर्चे को स्वीकार न करने के फैसले को चुनौती दी थी।
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मालूम हो कि नई दिल्ली विधानसभा सीट से नामांकन के अंतिम दिन 11 उम्मीदवार समय से पर्चा नहीं भर पाए थे, जिसके बाद उनका नामांकन स्वीकार नहीं किया गया। इसके ठीकरा उन्होंने निर्वाचन अधिकारी व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर फोड़ दिया।
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इन लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह समय से निर्वाचन कार्यालय पहुंच गए थे, लेकिन वहां मुख्यमंत्री के पहुंचने के बाद चुनाव अधिकारी उनका नामांकन भरवाने में लग गए और समय खत्म हो गया। चुनाव अधिकारी ने इसके बाद उनके नामांकन स्वीकार नहीं किये।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को इस याचिका का उल्लेख किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर सुनवाई के लिए अन्य पीठ के समक्ष भेज दिया। आज इस याचिका पर न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई की और खारिज कर दिया।
पेश याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता 20 जनवरी की सुबह भरे हुए नामांकन पत्र व जरूरी कागजातों के साथ सही समय पर नामांकन के लिए जाम नगर हाउस पहुंच गए थे। वहां पर प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों को निर्वाचन अधिकारी ने टोकन दिए थे और उसके आधार पर बारी-बारी से नामांकन स्वीकार किए जाने थे।
समय के आभाव के कारण सभी उम्मीदवारों के नामांकन जमा नहीं हो सके और निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें अगले दिन बुलाया था। निर्वाचन अधिकारी ने यह भी कहा कि उन लोगों के टोकन अगले दिन भी मान्य रहेंगे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब वह अगले दिन निर्वाचन कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने देखा कि टोकन के बजाय उम्मीदवारों के नाम एक कागज पर लिख कर रखे गए थे।
जब मुख्यमंत्री वहां पहुंचे तो उन्हें आवेदन के लिए अधिकारी सीधे अंदर ले गए। इसके पीछे निर्वाचन अधिकारी की बदनियति व मनमानी थी। इससे याचिकाकर्ताओं के चुनाव लड़ने के लोकतांत्रिक व संवैधानिक अधिकार का हनन हुआ है। इसलिए उनके नामांकन भरवाने के लिए चुनाव आयोग व मुख्य चुनाव अधिकारी व निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिया जाए।