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एम्स की बदहाली: पिता को गोद में उठाए भटकता रहा युवक, नहीं मिली व्हीलचेयर  

Sat, 13 Oct 2018 09:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Sat, 13 Oct 2018 09:40 PM IST
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youth lift father on lap in aiims rishikesh
पिता को गोद में लिए भटकता युवक - फोटो : अमर उजाला

एम्स में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए। इसके बावजूद बेहतर प्रबंधन न होने की वजह से मरीजों को दुर्दशा का सामना करना पड़ रहा है।

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व्यवस्थाएं इस कदर चरमरा गई हैं कि स्ट्रेचर और व्हीलचेयर तक मुहैया नहीं है। शनिवार को यहां ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सहारनपुर से आए रामकिशन का बेटा उन्हें गोद में लिए दर-दर भटकता रहा। लेकिन उन्हें एक अदद व्हीलचेयर नसीब नहीं हो पाई। उन्होंने कर्मचारियों से पूछा तो बताया कि अभी कोई स्ट्रेचर या व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं है।
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रामकिशन के पैरों में सेप्टिक हो गया है, जिसकी वजह से वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। बड़ी उम्मीद के साथ वे एम्स में इलाज कराने आए थे। उनका बेटा मनोज बड़ी देर तक व्हीलचेयर की तलाश करता रहा। निराशा हाथ लगी और पिता को गोद में उठाकर इमरजेंसी वार्ड पहुंचा। रिश्तेदारों ने पर्चा बनवा लिया। इसके बाद जांच के लिए फिर स्ट्रेचर की तलाश शुरू हुई। काफी मगजमारी करने के बाद भी मदद नहीं मिल पाई तो वह फिर से गोद में पिता को उठाकर डॉक्टर तक पहुंच पाया।  

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शौचालय बने कूड़ाघर, टवायलेट शीट पर पान की पीक 

एक तरफ इंटरनेशल सेमिनार चल रहा है तो दूसरी ओर एम्स की दीवारें, शौचालय और फाउंटेन पार्क व्यवस्था की कहानी बयां कर रहे हैं। चिकित्सा संस्थान होने के नाते सफाई और संसाधनों के प्रबंधन का जो सलीका होना चाहिए वो सब फेल दिखा।

तृतीय तल स्थित शौचालय शीट पर पान की पीक, वॉशरूम कूड़ाघर और टूटी कुर्सियों का कबाड़खाना जैसा दिखा। परिसर के बीचोबीच लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए फाउंटेन पार्क में पानी जमा है।

गंदे पानी के कारण अस्पताल में ही डेंगू संक्रमण का खतरा बना हुआ है। एम्स की दीवारें करोड़ों खर्च के बावजूद उखड़ गई हैं, जो घटिया निर्माण की कहानी बयां कर रही हैं। इन अव्यवस्थाओं को लेकर एम्स प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन वार्ता नहीं हो पाई। एम्स की ओर से पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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