खुशखबरी: MBBS करने के लिए लोन लेंगे आप, लेकिन भरपाई करेगी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब शासन एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसमें छात्र को एमबीबीएस कोर्स करने के लिए बैंक से लोन लेना होगा। डॉक्टर बनने के बाद सरकार लोन की किस्त अदा करेगी, लेकिन इसके लिए एक शर्त पूरी करनी होगी।
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रियायती शुल्क पर एमबीबीएस कोर्स कराने की व्यवस्था बंद किए जाने की तैयारी है। छूट लेकर पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के राज्य में सेवा देने से कन्नी काटने के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।
अब शासन एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसमें छात्र को एमबीबीएस कोर्स करने के लिए बैंक से लोन लेना होगा। इसके बाद जब वह डॉक्टर बनकर सरकारी अस्पतालों में सेवा देने के लिए तैयार होगा तो उसके लोन की मासिक किस्त राज्य सरकार चुकाएगी।
सरकारी अस्पतालों में सेवा देने की शर्त पर कम कर दी थी MBBS की फीस
उत्तराखंड में पहला सरकारी मेडिकल कालेज हल्द्वानी में खुला था, जहां 2004-05 में एमबीबीएस का कोर्स शुरू हुआ। शुरुआत के सालों में छात्रों को कोर्स की पूरी फीस चुकानी होती थी।
बाद में तत्कालीन खंडूरी सरकार ने उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में सेवा देने की शर्त पर एमबीबीएस की वार्षिक फीस मात्र 15 हजार कर दी थी।
इस छूट के बदले छात्रों को राज्य के अस्पतालों में पांच साल तक सेवा करने का अनुबंध करना होता है, लेकिन यह फार्मूला सफल नहीं हो सका है। वर्तमान में श्रीनगर मेडिकल कालेज, सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज (हल्द्वानी) और दून मेडिकल कालेज में एमबीबीएस कोर्स हो रहा है।
छात्र को 15 लाख का एजूकेशन लोन लेना होगा
इसमें प्रत्येक वर्ष 350 नए छात्र एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेते हैं। इस समय अनुबंध करने वाले छात्र को 50 हजार ट्यूशन फीस देनी होती है, जो अनुबंध नहीं करना चाहते हैं उनको हर साल चार लाख की फीस (पूरे कोर्स के दौरान 18 लाख रुपये) देनी होती है।
बहरहाल, अब शासन नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इसमें अनुबंध की व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। एमबीबीएस कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्र को 15 लाख का एजूकेशन लोन लेना होगा।
इसके बाद अगर वह सरकारी अस्पताल में 15 साल तक सेवा करता है, तो सरकार वेतन देने के साथ उसकी बैंक की किस्त भी खुद जमा करेगी। अगर वह सरकारी चिकित्सक के तौर पर सेवा नहीं देता है, तो सरकार किस्त देना बंद कर देगा। वर्तमान में श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में सौ-सौ सीट और दून मेडिकल कालेज में 150 सीट एमबीबीएस की हैं।
दो करोड़ की पेनाल्टी का प्रावधान
मौजूदा वक्त में जो छात्र एमबीबीएस का कोर्स अनुबंध के आधार पर करते हैं, उनको अनुबंध की शर्त तोड़ने पर कड़े जुर्माने का प्रावधान है। अनुबंध की शर्त तोड़ने पर दो करोड़ तक का जुर्माना वसूलने का नियम है। मगर अब तक यह जुर्माना वसूलने का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
स्थिति यह है कि कितने डॉक्टरों ने अनुबंध के आधार पर सरकारी मेडिकल कालेजों से पढ़ाई की और बाद में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सेवा की है, इसका पूरा ब्योरा शासन से लेकर डीजी हेल्थ कार्यालय तक में नहीं है।
एमबीबीएस कोर्स में अनुबंध की जगह एजूकेशन लोन की ईएमआई देने की व्यवस्था को लागू करने की तैयारी जा रही है। इसमें एजूकेशन लोन लेकर पढ़ाई करने वाला डॉक्टर अगर सरकारी अस्पताल में सेवा करता है, तो ही सरकार की ओर से उसकी मासिक किस्त अदा की जाएगी। रियायती फीस की सुविधा के दुरुपयोग को देखते हुए यह निर्णय लिया जा रहा है।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव