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Year Ender 2020 : उत्तराखंड में कोविड से शुरू में ठिठके कदम, बाद में संभले, याद रहेगा ये साल

Tue, 22 Dec 2020 12:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 22 Dec 2020 12:49 PM IST
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year ender 2020 : corona scars uttarakhand in starting but after managed
- फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO

2020 कोविड महामारी के रूप में हमेशा याद रहेगा। इस महामारी ने उत्तराखंड में जहां स्वास्थ्य सिस्टम को हिला कर रख दिया, वहीं पर्यटन कारोबार समेत अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी तगड़ा झटका दिया। प्रदेश में कोरोना की दस्तक से शुरूआत में उत्तराखंड ठिठक सा गया, लेकिन कोविड से सबक मिलने पर लड़खड़ाते कदम संभल गए।

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उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च 2020 को मिला था। विदेश से शैक्षिक भ्रमण से लौटे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का प्रशिक्षु आईएफएस कोरोना संक्रमित मिला था। उस समय प्रदेश में कोविड जांच की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जांच के लिए सैंपल चेन्नई भेजे गए। इसके बाद संक्रमण की रफ्तार दिन प्रतिदिन बढ़ती गई।
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प्रदेश की मौजूदा स्वास्थ्य सिस्टम के सहारे सरकार के सामने कोरोना संक्रमण से मुकाबला करने की सबसे बड़ी चुनौती थी। स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी, अस्पतालों में ऑक्सीजन व अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के बीच कोरोना से लड़ना आसान नहीं था।

संक्रमण रोकने के लिए सरकार ने 22 मार्च से लॉकडाउन घोषित कर दिया। जिससे आवश्यक सेवाओं को छोड़ कर सभी गतिविधियां पूरी तरह बंद हो गईं। सरकार का पूरा फोकस स्वास्थ्य सेवाओं पर था। इसके लिए अस्पतालों में इंतजाम करने में बजट की कमी आड़े नहीं आने दी।

स्वास्थ्य महानिदेेशक के साथ ही मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों को स्वास्थ्य व्यवस्थाएं जुटाने के लिए बजट खर्चे का अधिकार दिया गया। सरकार व विभाग का एक ही लक्ष्य था कि किस तरह से कोरोना संक्रमण का सामुदायिक फैलाव रोका जाए।

कोरोना मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों, पैैरामेडिकल स्टाफ, नर्सों के साथ फ्रंट लाइन कोरोना योद्धाओं ने रात दिन ड्यूटी पर मुस्तैद रह कर कोरोना से जंग लड़ी। वहीं, सरकार ने वेंटीलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, दस्तानों की पर्याप्त व्यवस्था की।

कोरोना दस्तक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के पास सौ वेंटीलेटर भी नहीं थे। वहीं, अस्पतालों में ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या भी पर्याप्त नहीं थी। सरकार ने कोरोना मरीजों के उपचार के लिए बुनियादी व्यवस्था पर जोर दिया।

अस्पतालों में बढ़ाई स्वास्थ्य सुविधाएं

शुरूआत में कोरोना मरीजों के उपचार के लिए पांच अस्पताल ही अधिकृत थे। लेकिन वर्तमान में प्रदेश में 38 कोविड अस्पताल व 422 कोविड केयर सेंटर स्थापित हैं। इनमें 30 हजार से अधिक बेड की व्यवस्था है। कोविड अस्पतालों में आईसीयू बेड के साथ वेंटीलेटर और ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। कोरोना संक्रमितों के लिए सरकार ने स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर में दो हजार बेड की क्षमता का सबसे बड़ा कोविड केयर सेंटर बनाया।

आयुर्वेद और होम्योपैथिक विभाग ने चलाया अभियान

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद और होम्योपैथिक विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाया गया। जिसमें आयुर्वेद विभाग की ओर से आयुष क्वाथ और होम्योपैथिक विभाग की तरफ से आर्सेनिक एल्बम की दवाई निशुल्क वितरित की गई।

कोरोना काल में 477 डॉक्टरों की तैनाती का रिकॉर्ड

प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए कोरोना काल में तीन दिन के भीतर स्वास्थ्य विभाग में 477 डॉक्टरों को तैनाती दी गई। वर्तमान में 728 डॉक्टरों और 1238 स्टाफ नर्सों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

क्वारंटीन सेंटर और कंटेनमेंट जोन

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को 14 दिन क्वारंटीन रखा गया। इसके लिए जिलों में सरकारी भवनों व निजी होटलों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए। वहीं, संक्रमण से बचाव के लिए कंटेनमेंट जोन बना कर लोगों की आवाजाही व अन्य गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया। कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश में लगभग तीन लाख प्रवासी उत्तराखंड लौटे हैं। प्रवासियों के लौटने से प्रदेश में संक्रमण में भी तेजी आई थी।

280 दिनों में 86 हजार से ज्यादा संक्रमित

प्रदेश में कोरोना काल के 280 दिन पूरे हो गए हैं। अब तक 16 लाख से अधिक सैंपलों की जांच की गई है। इनमें 86 हजार से अधिक लोग संक्रमित मिले हैं। जबकि 77 हजार से अधिक मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं, 1413 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है।

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