चार दिन बाद भी नहीं खुला यमुनोत्री हाईवे, भूस्खलन के कारण इस तरह धाम पहुंच रहे यात्री
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ओजरी में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण यमुनोत्री हाईवे बृहस्पतिवार को भी नहीं खुल पाया। मार्ग सोमवार देर रात से अभी तक बंद पड़ा है। डीएम ने आपदा प्रबंधन सचिव को पत्र भेजकर विशेषज्ञ व भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम भेजने की मांग की है।
डीएम ने दावा किया है कि रास्ते में फंसे हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और यमुनोत्री धाम की यात्रा वैकल्पिक पैदल मार्ग से वर्तमान में जारी है। जिला सभागार में पत्रकार वार्ता में डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ओजरी और डबरकोट के पास पहाड़ी से लगातार भूस्खलन जारी है, जिससे यमुनोत्री हाईवे खोल पाना पाना संभव नहीं है।
उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव को पत्र भेजकर भू वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम भेजने की मांग की है। ड्रोन कैमरे से भी पहाड़ी के ऊपर भूस्खलन जोन की वीडियो बनाकर आपदा प्रबंधन को भेजी गई है। यमुनोत्री की यात्रा रुकी नहीं है।
गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया
यात्रा लगातार सुचारु रूप से वैकल्पिक पैदल मार्ग से जारी है। इस बीच 620 यात्री यमुनोत्री धाम की यात्रा पर गए हैं, जबकि 1313 यात्रियों को ट्रांस्मेंट व्यवस्था के तहत बड़कोट पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि मौके पर ड्रिल, पोकलैंड मशीन के साथ दो जेसीबी हैं।
जानकीचट्टी से स्यानाचट्टी के बीच करीब 80 लोग अपने वाहनों के लिए स्वइच्छा से रुके थे, जो अब वहां से आना चाहते हैं। उन्हें शाम तक वैकल्पिक रास्ते से निकाल दिया जाएगा। रास्ते में चिकित्सा व्यवस्था के साथ खाने-पीने, रहने और पैसे निकालने के लिए अब मोबाइल बैंकिंग की भी सुविधा की जा रही है।
करीब 14 गांव की 13 ऐसी गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनकी डिलिवरी डेट नजदीक है। उन्हें बड़कोट अस्पताल में लाने की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भूस्खलन के कारण ओजरी के ग्रामीणों को जो नुकसान हुआ है। उन्हें मुआवजा देने के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जाने के लिए वैकल्पिक पैदल मार्ग के लिए डंडी कंडी और घोड़े खच्चरों की व्यवस्था की गई है।