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बाल साहित्य लेखन देता है सबसे ज्यादा सुकून: रस्किन

Sat, 18 Jan 2020 01:45 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2020 01:45 AM IST
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Writing Children's Literature is relaxed: Ruskin
राजपुर रोड स्थित डब्‍ल्यूआईसी सभागार में आयोजित परिचर्चा में बच्चों के सवालों का जवाब देते पदमश
देहरादून। दुनिया के महान साहित्यकारों एवं लेखकों में से एक पद्मश्री रस्किन बॉन्ड का कहना है कि बच्चों के लिए कुछ भी लिखना उन्हें सबसे ज्यादा सुकून देता है। इसके अलावा प्रकृति, जंगली जानवरों से जुड़ी चीजों को लिखने में भी आनंद आता है। लेकिन, प्रकृति के खिलाफ कुछ होता देखकर उन्हें बहुत दुख होता है। शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पदमश्री ने अपने जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारियां साहित्यकारों, लेखकों और बच्चों से साझा की।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नदियों, वन्यजीवों और प्रकृति का संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। मानवता को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दुनिया के हरेक इंसान को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। माता-पिता का विशेष ख्याल रखना चाहिए। पुराने दोस्तों को याद करते हुए रस्किन ने कहा कि लेखन में उनके दोस्तों की भूमिका अहम रही है। नदियां, फूल-पौधे, जंगली जानवर उनके लेखन का हिस्सा अब तक हैं। जीवन की अंतिम सांसों तक लेखन कार्य करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि उन्होंने अपना पहला उपन्यास ‘द रूम ऑन द रूफ ’ तब लिखा था जब वह मात्र 17 साल के थे। इस उपन्यास ने ‘जॉन लेवेलिन मेमोरियल’ पुरस्कार जीता था। कार्यक्रम के दौरान रस्किन बॉन्ड ने मसूरी और देहरादून से जुड़ी यादें भी साझा की। देहरादून के कई इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अपने पिता के साथ वे कई मकानों में बतौर किराएदार रहे। इस दौरान उन्होंने एस्लेहाल चौराहे पर दोस्तों के साथ कॉफी पीने की यादें भी साझा की। डब्ल्यूआईसी की अध्यक्ष नाजिया यूसुफ इजुद्दीन ने इस दौरान रस्किन से कई सवाल जवाब किए। कार्यक्रम का संचालन मनीषा डोगरा ने किया। उत्कृष्ट सवाल करने पर कई बच्चों को रस्किन बॉन्ड ने पुस्तकें देकर सम्मानित किया।
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लेखक की बजाय सेनाधिकारी बनाना चाहती थी मां
रस्किन बॉन्ड ने खुलासा किया कि उनकी मां उन्हें सेनाधिकारी बनाना चाहती थी। लेकिन, वे सेना में नहीं जाना चाहते थे। उन्होंने मां से स्पष्ट कहा था कि वे लेखक बनना चाहते हैं और उन्होंने यह कर के दिखाया। कार्यक्रम के दौरान उनकी एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
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चार्ल्स डिकेंस की ‘डेविड कापरफील्ड’ पसंदीदा पुस्तक
एक बच्चे ने रस्किन से कहा कि लेखन को लेकर पूरी दुनिया उनकी मुरीद है। लेकिन, एक लेखक के तौर पर वह किसके मुरीद हैं। इस पर उन्होंने महान लेखक चार्ल्स डिकेंस के मुरीद होने की बात कही। उनकी लिखी रचना ‘डेविड कापरफील्ड’ पसंदीदा किताबों में से एक बताया।
आज भी कलम से पन्ने पर उतारते हैं साहित्य
लेखक रस्किन बॉन्ड ने एक बच्चे के सवाल पर कहा कि उन्होंने जितनी भी किताबें लिखी, उनका प्रत्येक शब्द कलम से पन्ने पर उतारा है। कभी कंप्यूटर का प्रयोग नहीं किया। दूसरे बच्चे ने सवाल किया कि क्या उन्हें भूतों से डर लगता है तो उन्होंने इनकार किया। बताया कई दशक पूर्व राजाजी टाइगर रिजर्व में भ्रमण के दौरान उन्होंने रात को अतिथिगृह में रखी लेखक एमआर जेम्स की भूतों वाली किताब पढ़ी थी। एक बच्चे ने सवाल किया कि मिठाई में उन्हें क्या पसंद है? इस पर उन्होंने जलेबी पसंदीदा मिठाई बताई।

साहित्य अकादमी, पदमश्री से सम्मानित
लेखक रस्किन बॉन्ड को उनके लघु कथा संग्रह ‘अवर ट्रीज स्टिल ग्रो इन देहरा’ के लिए वर्ष 1992 में साहित्य अकादमी और बाल साहित्य में योगदान के लिए वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।
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