अस्पताल में ताला, तड़पते हुए बरामदे में जन्मा बच्चा
सरकारी अस्पतालों की बदहाली की वजह से जौनसार बावर क्षेत्र की दो महिलाओं की जान पर बन आई। पीएचसी त्यूनी में स्टाफ नहीं होने से जहां एक गर्भवती ने बच्चे को अस्पताल के बरामदे में जन्म दिया, वहीं, सीएचसी साहिया में इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं मिलने प्रसव पीड़िता को लेकर परिजन भटकते रहे।
शुक्रवार देर शाम भूमदेई पत्नी पिंटू निवासी हनोल को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्यूनी लेकर पहुंचे तो वहां ताला लटका था। फार्मासिस्ट के घर से आने तक भूमदेई अस्पताल के बरामदे में दर्द से तड़पती रही। आखिरकार उसने बरामदे में ही बच्चे को जन्म दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर छुट्टी पर चल रहे हैं, जबकि अस्पताल में नर्स और एएनएम का पद अप्रैल से ही खाली है। कई बार की शिकायत के बाद भी नर्स और एएनएम की तैनाती नहीं की गई। फार्मासिस्ट अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि फिलहाल जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है।
सीएचसी साहिया की इमरजेंसी में नहीं मिला डॉक्टर
सीएमओ डॉ. एसपी अग्रवाल का कहना है कि स्टाफ के बाबत डीजी हेल्थ को पत्र लिखा गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अस्पताल में नर्स और एएनएम की तैनाती के प्रयास किए जा रहे हैं।
उधर, शनिवार सुबह पणायसा निवासी शिवानी पत्नी राहुल को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे निजी वाहन से पीपीपी मोड पर संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया लेकर पहुंचे। लेकिन यहां इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं मिला।
हारकर परिजन उसे उसे 40 किमी दूर विकासनगर ले गए, जहां उसने बच्चे को जन्म दिया। अब जच्चा और बच्चा की हालत ठीक है। सीएमएस डॉ. संजीव दत्त ने कहा कि मामला गंभीर है। अस्पताल में डॉक्टर तैनात करने की जिम्मेदारी राजभरा मेडिकेयर की है। संस्था से जवाब मांगा गया है। उच्चाधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया गया है।