World Tourism Day 2020: संकट में 'सैरसपाटा', कहीं सुधरे हालात तो कहीं सैलानियों का इंतजार
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उत्तराखंड राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन के योगदान की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पहाड़ी राज्य में कृषि का योगदान लगभग दस फीसदी है जबकि पर्यटन का पंद्रह फीसदी। कोरोना ने पर्यटन उद्योग का कचूमर निकाल डाला है। आलम यह है कि जीएमवीएन और केएमवीएन की ओर संचालित राज्य के सरकारी अतिथिगृह कोविड सेंटरों में तब्दील हो चुके हैं। होटल, स्टे होम के अड्डों में सन्नाटा पसरा है।
मसूरी, धनौल्टी, चारधाम, चकराता, फूलों की घाटी, नैनीताल, कौसानी जैसे देश-विदेश में विख्यात पर्यटन स्थलों को सैलानियों का इंतजार है। सैलानियों को घुमाने वाली टैक्सियों-मैक्सियों के इंजन में जंग लगने लगी है। अनलॉक -4 में उत्तराखंड सरकार सैलानियों को देवभूमि में दोबारा लाने का भरसक प्रयास कर रही है। होटलों- स्टे होम स्थलों की बुकिंग पर 25 फीसदी की छूट का एलान इसी कवायद की एक कड़ी है। लेकिन यह भी समझना होगा कि इस बार ग्रीष्म कालीन पर्यटन का पूरा सीजन कोरोना की भेंट चढ़ जाने के बाद राज्य में इस उद्योग को पटरी पर लाना प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
मसूरी : होटल बुकिंग में आई तेजी
पहाड़ों की रानी मसूरी में प्रदेश सरकार की नई गाइडलाइन से पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। छूट के बाद पहले वीकेंड पर मसूरी के होटल में औसतन 40 फ़ीसदी बुकिंग रही है। अगले हफ्ते भी मसूरी में 70 फ़ीसदी बुकिंग आ चुकी है। मसूरी होटल एसोसिएशन के सचिव संजय अग्रवाल ने बताया कि पर्यटक बढ़ने के साथ ही कोरोना का भी खतरा बढ़ेगा संक्रमण से बचाव के पूरे इंतजाम किए गए हैं। स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा रहा है। बिना मास्क होटल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। सैनिटाइजेशन की पर्याप्त व्यवस्था है। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
हरिद्वार : नहीं सुधर रही बदहाली
अनलॉक-4 के तहत मिली राहतों के बावजूद अन्य प्रदेशों के यात्री चारधाम यात्रा के लिए नहीं आ रहे हैं। हरिद्वार में पर्यटन विभाग में करीब 175 एजेंसियां पंजीकृत है, जबकि 550 से अधिक एजेंसियां खुली हुई हैं। हरिद्वार में करीब 15 हजार ऑटो, टैक्सी एवं अन्य व्यवसायिक वाहन पंजीकृत है। हरिद्वार ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश पालीवाल कहते हैं कि सरकार पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों की लगातार अनदेखी कर रही है। वहीं महामंत्री सुमित श्रीकुंज कहते हैं कि चारधाम यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों को कोविड टेस्ट की सुविधा फ्री करनी चाहिए। यात्रा पर आने वाले यात्रियों का पंजीकरण भी अलग व सरल करने के साथ पर्यटन मंत्रालय द्वारा पूरे देश में यात्रा का प्रचार करना चाहिए । ट्रेवल व्यवसायी आकाश शर्मा भी चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों को छूट देकर या नियमों में ढिलाई की वकालत करते हैं। वहीं जिला पर्यटन अधिकरी सीमा नौटियाल का कहना है कि कोरोना संक्रमण होने की आशंका के चलते हुए यात्री अभी आने में हिचकिचा रहे हैं। प्रयास है कि प्रदेशों में आवागमन की शर्तों में ढिलाई देने से यात्री आने लगेंगे।
रुड़की : सौ से अधिक होटलों पर लटके ताले
लॉकडाउन में शिथिलता के बाद से होटल खुले भी लेकिन उनमें ग्राहक नहीं है। बाहर से यात्रियों को आने में पूरी छूट नहीं मिल पाने के कारण होटल खाली पड़े हैं। ऐसे मं होटलों में छंटनी की जा रही है। लगभग तीस प्रतिशत कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। जो बचे हैं उनके वेतन में कटौती कीजा रही है। सेंटर प्वाइंट होटल के मैनेजर प्रदीप जैन ने बताया कि रूटीन में आने वाले स्थानीय लोग भी खाना खाने के लिए होटलों में नहीं पहुंच रहे हैं। उधर, पिरान कलियर तीर्थयात्रियों के लिए बड़ा केंद्र हैं। लेकिन इस बार सालाना उर्स पर ग्रहण लगा हुआ है। ऐसे में कलियर में भी पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाने वाले उर्स पर असमंजस को लेकर पर्यटन को बड़ा झटका लगा है।
ऋषिकेश : अगले महीने से सुधर सकते हैं हालात
ऋषिकेश से चारधाम यात्रा पर निर्भर रहने वाले गढ़वाल मंडल टैक्सी मालिक एसोसिएशन की अधिकांश गाड़ियां खड़ी हैं। टैक्सी एसोसिएशन के सचिव विजेंद्र सिंह कंडारी ने बताया कि बाहरी राज्यों से लोग के फोन पर यात्रा खुलने, टैक्सी चालू होने और किराया के बारे मेें जानकारी ले रहे हैं, लेकिन अभी कोई आ नहीं रहा है। उन्होंने एक अक्तूबर से हालात में सुधार की उम्मीद जताई है। वहीं होम स्टे के कारोबार से जुड़े अभय शर्मा बताते हैं कि बाहरी राज्यों से टूरिस्ट केवल जानकारी पूछ रहे हैं। अभी कोई आ नहीं रहा है। वहीं दुकानदारों की स्थिति भी ठीक नहीं है। क्षेत्र रोड, लाजपत राय रोड, लक्ष्मणझूला रोड, देहरादून रोड के दुकानदारों का कहना था कि कारोबार महज 30 प्रतिशत रह गया है। यदि पर्वतीय क्षेत्रों में बसें नियमित रूप से चलें, किराया नार्मल हो, पाबंदियां कुछ खत्म हो तो कारोबार में कुछ वृद्धि होगी।
कण्वाश्रम-भरतनगर-लैंसडौन पर्यटन सर्किट योजना पर नहीं हुआ काम
मालिनी नदी के तट पर स्थित कण्वाश्रम से लेकर महाबगढ़, पौखाल तक की पूरी घाटी प्राकृतिक सौंदर्य से भरी पड़ी है, जिस पर राज्य गठन के बाद ट्रैकिंग रूट तो दूर यूपी के जमाने में बनी छह फुटी पैदल मार्ग तक बदहाल हो चुका है। वर्ष 2011 में कोटद्वार को फोकस करते हुए बनाई गई जीएमवीएन का दिल्ली-चीला-कण्वाश्रम-हल्दूपड़ाव पैकेज टूर भी दोबारा नहीं चल सका। पर्यटन विभाग की ओर से कौड़िया में कार्बेट के उत्तरी द्वार के नाम से बनाए गए पर्यटक आवास गृह का अभी तक लोकार्पण ही नहीं हो सका। कौड़िया का यह पर्यटक आवास गृह कोविड केयर सेंटर के काम लाया गया है। क्षेत्र का पूरा पर्यटन लैंसडौन के भरोसे चल रहा है।
कोटद्वार और कण्वाश्रम में गढ़वाल मंडल विकास निगम के दो पर्यटक आवास गृह हैं। 1977 में बने कोटद्वार के पर्यटक आवास गृह की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। कण्वाश्रम में बने पर्यटक आवास गृह की हालत सुधारी गई है, लेकिन यहां भी पर्यटकों का टोटा बना है। अब पर्यटन विभाग ने यहां हट बनाने के लिए 67 लाख रुपये मंजूर किए हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने और उन्हें सूचना देने के उद्देश्य से देवीरोड कोटद्वार में बना पर्यटन सूचना केंद्र खंडहर हो चुका है। । हिमालयी धरोहर अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. पदमेश बुड़ाकोटी और भरत शोध संस्थान के अध्यक्ष डा. डीसी बेबनी का कहना है कि कोटद्वार में कण्वाश्रम से लेकर भरतनगर, चरेख, दुगड्डा और मोरध्वज किले की परिधि में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। यहां पर्यटकों का रुख करने के लिए सरकार को व्यापक इंतजाम करने होंगे।
पर्यटकों की नजरों से ओझल हैं चमोली के कई स्थल
चमोली जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ ऐसे पर्यटन स्थल भी हैं जिन्हें आज भी राज्य स्तर पर विशेष पहचान नहीं मिल पाई है। जिले में निजमुला घाटी का सप्तकुंड, दुग्धकुंड, गौणा-दुर्मिताल, देवाल क्षेत्र के अंतर्गत बेदनीबुग्याल आज भी पर्यटकों की नजर से ओझल है।
चेनाप वैली में भी खिलते हैं सैकड़ों प्रजाति के फूल
जिले में फूलों की घाटी की तर्ज पर एक और घाटी है, जिसे चेनाप वैली कहा जाता है। इस घाटी में बुग्यालों के बीच जून से अक्तूबर तक सैकड़ों प्रजाति के फूल खिलते हैं। यहां पहुंचने के लिए जोशीमठ से 10 किमी चाई गांव तक सड़क से पहुंचने के बाद थैंग गांव होते हुए करीब 18 किमी का पैदल ट्रैक है। यहां कुदरती बनी क्यारियों में जहां फूल खिलते हैं वहीं कई हिमालय की चोटियों के दीदार भी होते हैं।
दियारीसेरा में प्राकृतिक धान और मंडुवा
जोशीमठ के करछौं गांव से करीब आठ किमी की चढ़ाई के बाद पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर दियारीसेरा बुग्याल है। यहां पर प्राकृतिक रूप से धान और मंडुवा उगता है। लोक मान्यताओं के अनुसार वन देवियां इस फसल को उगाती हैं। सीजन पर फसल तैयार होती है और खुद ही समाप्त हो जाती है। यहां अनुमान ताल के नाम से एक तालाब भी है। यहां पहुंचने के लिए जोशीमठ से 17 किमी वाहन के बाद करछौं गांव करीब आठ किमी पैदल ट्रैक है। इस ट्रैक से नंदा घुंघटी, त्रिशूल, नंदा देवी, चौखंबा, बंदरपूंछ और सप्तकुंड पर्वत श्रृंखलाओं के दर्शन भी होते हैं।
क्वारीं पास ट्रैक पड़ा वीरान
ब्रिटिश कालीन भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन ने 1902 में अल्मोड़ा-ग्वालदम-तपोवन ट्रैक बनाया था। इसे लार्ड कर्जन ट्रैक या क्वांरी पास ट्रैक भी कहते हैं। करीब 200 किमी लंबे इस ट्रैक का रूट अल्मोड़ा से शुरू होकर ग्वालदम, वाण, सुतोल, कनोल, रामणी, झींझी, पाणा, क्वांरीपास, करछों, तपोवन तक है। विभिन्न नदी घाटियों से गुजरने वाला यह रूट जर्जर है और पुलिया टूटी पड़ी है।
टिहरी : टिहरी झील में बोटिंग के लिए प्रतिदिन70-80 पर्यटक ही पहुंच रहे
टिहरी जिले में धनोल्टी, कैंपटी फॉल, टिहरी बांध की झील प्रमुख पर्यटक स्थल हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद पर्यटक स्थल वीरान पड़े हैं। इन स्थानों पर होटल, ढाबे, बैंबो हट्स, टेंट कॉलोनी खाली हैं। टिहरी झील में 22 सितंबर से बोटिंग शुरू हो गई है, लेकिन इन पांच दिनों में टिहरी झील में औसतन एक दिन में 70 से 80 पर्यटक ही पहुुंच पा रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में बोटिंग के लिए 500 से लेकर 600 पर्यटक पहुंचते थे। होटल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद भट्ट ने बताया कि कोरोना का बहुत बुरा असर पड़ा है। होटलों का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया है। कभी-कभार स्थानीय लोग ही होटलों में पहुंच रहे है।
टिहरी गढ़वाल टैक्सी चालक एसोसिएशन के संरक्षक टीकम सिंह चौहान का कहना है कि सप्ताह में जीप-टैक्सियों की दो-तीन दिन की बुकिंग भी मुश्किल से मिल पा रही है। धनोल्टी के व्यापारी किशन सिंह का कहना है कि दुकान पर भी एक-दो ग्राहक ही आते हैं। कोटी कालोनी के व्यापारी संजय कुमार, मदन सिंह ने बताया कि झील में बोटिंग शुरू होने पर 25 प्रतिशत तक व्यवसाय बढ़ा है। जिले में 159 होम स्टे संचालित होते हैं, लेकिन मार्च माह से पर्यटकों ने होम स्टे की तरफ रुख नहीं किया।
उत्तरकाशी : उम्मीद से बहुत कम आ रहे पर्यटक
बीते साल गंगोत्री धाम में रिकॉर्ड 5,28,017 तथा यमुनोत्री धाम में साढ़े चार लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे थे। जबकि पर्वतारोहण व ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध गंगोत्री नेशनल पार्क में 19 हजार से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। इसके अतिरिक्त गोविंद वन्य जीव विहार, डोडीताल, दयारा बुग्याल आदि पर्यटन स्थलों की सैर के लिए भारी तादात में पर्यटक पहुंचे थे। इस बार 26 अप्रैल को यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद से अभी तक महज छह हजार तीर्थयात्री ही इन धामों तक पहुंचे हैं। इनमें भी अधिकांश स्थानीय लोग ही शामिल हैं।
गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग व माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा कहते हैं कि साहसिक खेलों के लिए अधिकांश पर्यटक मार्च से जून माह तक ही आते हैं। गंगोत्री नेशनल पार्क व अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों को नवंबर अंत तक बंद कर दिया जाता है। ऐसे में अब बचे हुए केवल एक माह में नुकसान की भरपाई हो पाना असंभव है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र मटूड़ा कहते हैं कि चार धाम यात्रा और ट्रैकिंग व माउंटेनियरिंग सीजन लगभग समाप्त होने वाला है। वहीं लोगों में कोरोना संक्रमण का डर भी बना हुआ है।