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शौचालय दिवस 2021: उत्तराखंड में ओडीएफ का बस इतना सा फसाना, हाथ में बोतल और जंगल में जाना 

Fri, 19 Nov 2021 03:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 19 Nov 2021 03:28 PM IST
सार

उत्तराखंड को हुक्कामों में खुले में शौच से मुक्त प्रदेश का दर्जा दिया है। लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में कुछ और हकीकत ही निकलकर सामने आई।

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World Toilet Day 2021: Open Defecation Free reality in uttarakhand
शौचालयों पर लटके ताले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुछ सरकारी योजनाएं बहुत अच्छी होती हैं। उन पर अमल के लिए सरकारी अमला जुटता भी है। आंकड़ों केे जरिए कागजों के पेट भी अच्छी तरह भरे जाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है।

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खुले में शौच से मुक्ति योजना सराहनीय है। उत्तराखंड को हुक्कामों में खुले में शौच से मुक्त प्रदेश का दर्जा दिया है। लेकिन अमर उजाला की पड़ताल में कुछ और हकीकत ही निकलकर सामने आई। लगभग सारे जिलों में ओडीएफ की हालत लगभग एक जैसी ही है। पहाड़ के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों, यहां तक कि पर्यटन स्थलों पर अभी भी लोग पानी की बोतल लिए जंगल ही जा रहे हैं। 
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हरिद्वार : शौचालयों पर ताले
कागजों में हरिद्वार जनपद वर्ष 2017 में ओडीएफ घोषित हो चुका है। जिला प्रशासन का दावा है कि जनपद में अब कहीं भी खुले में शौच नहीं होता है। इसके लिए परिवारों में सरकारी योजना से शौचालयों का निर्माण कराया गया है। शहरों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं। धर्मनगरी में सुलभ शौचालय का निर्माण हुआ है, ताकि धर्मनगरी आने वाले यात्री शौच के लिए इधर-उधर न भटके। लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट है। धर्मनगरी में आने वाले यात्रियों और अन्य लोगों को शौचालय होने के बाद भी परेशान होना पड़ रहा है। शौचालयों पर ताले लटके होने से लोग शौचालय नहीं जा पाते हैं।  
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उत्तरकाशी: हवाई साबित हो रहा ओडीएफ का दवा
जिला मुख्यालय में यह दावा हवाई साबित हो रहा है। भागीरथी (गंगा) किनारे लोग खुले में शौच को जाते हैं। यहां मजदूरी से जुड़े कामगार तबके के लोग शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र बिष्ट का कहना है कि अधिकारियों ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए कागजों में जिले को ओडीएफ घोषित किया है। इधर, नगर पालिका बाड़ाहाट उत्तरकाशी के ईओ सुशील कुरील का कहना है कि नगर के सभी 11 वार्ड ओडीएफ हैं। हर वार्ड में सार्वजनिक शौचालय के साथ मोबाइल शौचालय हैं।

रुद्रप्रयाग: पर्यटक स्थलों में नहीं शौचालय
रुद्रप्रयाग जिले के 681 गांवों को वर्ष 2017 में ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन पर्यटक स्थल चोपता सहित द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ में आज भी शौचालय की सुविधा नहीं है। जिले में 2 अक्तूबर 2016 में सबसे पहले ऊखीमठ ब्लॉक को ओडीएफ घोषित किया गया था। इसके बाद जखोली और बाद में अगस्त्यमुनि ब्लॉक को। इन तीनों ब्लॉकों की 336 ग्राम पंचायतों के 681 गांव आज के दिन में ओडीएफ हैं, लेकिन कोरोनाकाल में गांवों में कई प्रवासी परिवार लौटे हैं। साथ ही कई संयुक्त परिवारों का भी बंटवारा हो चुका है, जिससे कई लोग शौचालय सुविधा से वंचित हैं। स्वजल परियोजना के प्रबंधक व परियोजना अर्थशास्त्री मोहन सिंह नेगी ने बताया कि बीते डेढ़ वर्ष में गांवों में कई परिवार बढ़े हैं, जिनके पास शौचालय नहीं है। 

नई टिहरी: गांवों में अनेक परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर

कई गांव में ग्रामीणों के पास शौचालय नहीं है। 2012 की आधारभूत सर्वेक्षण के अनुसार 35 हजार 446 परिवार शौचालय विहीन पाए गए थे। स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वजल परियोजना ने शौचालय विहीन परिवारों को प्रेरित कर 2017 में लक्ष्य को हासिल कर जिले को खुले में शौच से मुक्त कर दिया था। शौचालय निर्माण करने वाले परिवारों को 12-12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। करीब दो हजार परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने शौचालय निर्माण कर प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन किए हैं। चाह गडोलिया के प्रधान प्रकाश कुमार, ढुंग की बीडीसी सदस्य बबीता रावत ने  वंचित परिवारों को भी शौचालय निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि देने की मांग की। 

चमोली : ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश परिवार शौचालय विहीन
चमोली आंकड़ों में एक वर्ष पूर्व पूर्ण रूप से ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) हो गया है, लेकिन हकीकत इससे उलट है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के यहां शौचालय नहीं हैं। उर्गम घाटी के डुमक, कलगोठ, भेंटा, अरोसी, देवग्राम गांव में कई परिवारों के यहां शौचालय नहीं हैं। अरोसी गांव के मोहन सिंह, देवग्राम के कुलदीप सिंह, देवेंद्र सिंह, मोहन सिंह, राजेंद्र सिंह व विक्रम सिंह, पिलखी गांव के महावीर सिंह व नरेंद्र सिंह पंवार और कलगोठ गांव के मनोज सिंह व भगत सिंह के शौचालय नहीं हैं। उर्गम के पूर्व प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि प्रशासन ने जिले को ओडीएफ घोषित करने में जल्दबाजी की है। घाट और जोशीमठ ब्लॉक के कई गांवों में शौचालयों का अभाव है। स्वजल के प्रभारी परियोजना प्रबंधक प्रकाश रावत ने बताया कि  यदि अभी भी कुछ परिवार शौचालय विहीन हैं, तो उन्हें इस वर्ष पूर्ण कर लिया जाएगा। 

पौड़ी : समस्त पंचायतें ओडीएफ और निकाय हुए ओडीएफ प्लस
जनपद पौड़ी में समस्त ग्राम पंचायत ओडीएफ हो चुके हैं, जबकि समस्त निकाय क्षेत्र ओडीएफ प्लस हो गए हैं। परियोजना प्रबंधक स्वजल दीपक रावत ने बताया कि जिले की समस्त 1174 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो गई हैं, जबकि इन पंचायतों में ओडीएफ के अगले दौर में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जल निकासी, स्वच्छता को लेकर 302 ग्राम पंचायतें ओडीएफ प्लस हो पाई हैं। कहा कि सभी पंचायतों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। वहीं निकाय क्षेत्रों के नोडल अधिकारी ईओ प्रदीप बिष्ट ने बताया कि जिले के नगर निगम कोटद्वार के 40 वार्ड, नगर पालिका पौड़ी के 11, श्रीनगर के 13, नगर पालिका दुगड्डा, नगर पंचायत सतपुली व स्वर्गाश्रम के 4-4 वार्ड ओडीएफ प्लस हो चुके हैं। जिले में ओडीएफ प्लस होने वाला नगर पालिका पौड़ी पहला निकाय बना है।

देहरादून: उत्तराखंड के सभी निगम-निकाय कागजों में ओडीएफ 
प्रदेश में सभी शहरी क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त हैं। यानी सभी शहरी क्षेत्र ओडीएफ हैं। इससे आगे बढ़कर करीब 57 निकाय के क्षेत्र ओडीएफ प्लस श्रेणी में हैं जबकि देहरादून, चंबा और मुनिकीरेती ओडीएफ प्लस प्लस श्रेणी में हैं। अपर निदेशक अशोक पांडेय के मुताबिक, हर छह माह में केंद्र की टीम ओडीएफ के सभी मानकों का परीक्षण करती है। कई निकाय ओडीएफ से बढ़कर ओडीएफ प्लस के लिए आवेदन करते हैं या ओडीएफ प्लस वाले ओडीएफ प्लस प्लस के लिए आवेदन करते हैं। केंद्र की टीम सभी मानकों को देखने के बाद ही श्रेणी का आवंटन करती है। फिलहाल, प्रदेश के सभी निगम-निकाय ओडीएफ यानी खुले में शौच से मुक्त हैं।

बागेश्वर : जिला खुले में शौच से मुक्त, लक्ष्य से अधिक बने शौचालय
जिला खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो गया है। जिले में लक्ष्य से अधिक शौचालय बने हैं। स्वजल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 15 हजार 844 शौचालय बनाने का लक्ष्य था। स्वजल और मनरेगा से अब तक 16 हजार 767 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। जिला दो वर्ष पूर्व ही खुले में शौच से मुक्त हो चुका था। स्वजल की प्रभारी परियोजना प्रबंधक शिल्पी पंत ने बताया कि अब भी कोई परिवार किन्हीं कारणों से छूट गया है तो वह शौचालय के लिए आवेदन कर सकता है।

चंपावत : शौचालय बने दो साल बीत गए नहीं हुआ भुगतान
शौचालय 2019 में बना चुके राजेंद्र राय और सुनील राय प्रोत्साहन राशि के लिए स्वजल कार्यालय के कई बार चक्कर लगा चुके हैं। हर बार उन्हें बजट नहीं होने की दलील देकर टरका दिया जाता है। ये दो लोग तो बस उदाहरण भर हैं। चंपावत जिले में 2503 ऐसे लोग हैं, जिन्हें शौचालय के निर्माण के दो साल बाद भी भुगतान नहीं किया जा सका है। परियोजना निदेशक एसके पंत का कहना है कि स्वजल निदेशालय से बजट की मांग की गई है। कहने को जिला नवंबर 2016 में ही ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हो चुका है। जिले के कई गांवों में 262 परिवारों के पास शौचालय नहीं है।

पिथौरागढ़ : 936 लाभार्थियों को मिलेगा शौचालय

सीमांत जिले में इस समय 936 परिवार शौचालय विहीन हैं। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 34825 परिवारों को पहले और दूसरे चरण में शौचालय का लाभ दिया जा चुका है। तीसरे चरण में 936 परिवारों के लिए शौचालय निर्माण किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के आठ विकासखंडों में पहले चरण में  31339 लाभार्थियों के लिए शौचालय का निर्माण किया गया, जिसका सर्वेक्षण वर्ष 2012 में किया गया था। दूसरे चरण में सर्वेक्षण के आधार पर 3486 परिवारों के लिए शौचालय का निर्माण किया गया। तीसरे चरण में 936 के लिए शौचालय का निर्माण किया जाना है।

ऊधमसिंह नगर : नए परिवार बन रहे ओडीएफ की राह में रोड़ा
सरकार ने क्षेत्र को ओडीएफ घोषित कर दिया है। इसके बाद भी लोगों के खुले में शौच जाने का सिलसिला जारी है। पार्षद और गांवों के प्रधान भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि न तो नगर निगम क्षेत्र पूरी तरह से ओडीएफ हो सका है और न ही गांवों को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्ति मिली है। सहायक नगर आयुक्त आलोक उनियाल ने बताया कि नए परिवारों को टॉयलेट देने का सिलसिला लगातार जारी है। नए आवेदकों को समय-समय पर नए टॉयलेट मुहैया भी कराए जाते हैं।

नैनीताल : दावा ओडीएफ का हकीकत अभी दूर
स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन का दावा है कि नैनीताल जिले के सभी गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने का काम पूरा कर लिया है। यह भी दावा है कि जिले भर में अब कहीं भी कोई भी व्यक्ति खुले में शौच के लिए जाता है। हकीकत दावों से इतर है। हल्द्वानी नगर निगम की ही बात करें तो यहां के लोग रेलवे पटरी और गौला नदी में शौच के लिए जा रहे हैं। इस बारे में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल का कहना है कि हमारा नगर निगम ओडीएफ प्लस हो चुका है। कुछ बस्तियां जो गौला नदी और रेलवे लाइन के किनारे बसीं है वहां पर किसी भी योजना के तहत शौचालय नहीं बनाए जा सकते। 

अल्मोड़ा : कागजों में जिला ओडीएफ, हकीकत में नहीं
कागजों में जिला ओडीएफ है लेकिन हकीकत कुछ और है। जिले के कई गांवों में आज भी शौचालय नहीं है। कस्बों के तो और भी बुरे हाल है। स्वजल के परियोजना अधिकारी शैलेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया 2014 के सर्वे के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले से शत प्रतिशत शौचालय बन चुके हैं। जिला ओडीएफ मुक्त है। मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की राशि लाभार्थियों को दी जाती है। लोगों का कहना है कि जमीनी हकीकत कुछ और है। कागजों पर शौचालय पूर्ण है लेकिन धरातल पर इनका वजूद नहीं है। जो शौचालय बने थे वह जर्जर हो गए हैं। ऐसे में गांवों के लोग खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। 

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