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World Heart Day 2021: सरकारी अस्पतालों का हाल, न डॉक्टर न उपचार, हार्ट के मरीज लाचार 

Wed, 29 Sep 2021 10:27 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal बसंत कुमार , अमर उजाला, हरिद्वार
बसंत कुमार , अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 29 Sep 2021 10:27 AM IST
सार

2021 World Heart Day: हरिद्वार जनपद में तीन बड़े अस्पताल हैं। तीनों में सरकार की ओर से मरीजों को सभी स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मेला और रुड़की संयुक्त अस्पताल में सालों से कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं है।

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world heart day 2021: no doctor no treatment of heart patients in government hospital
विश्व हृदय दिवस 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

हृदय रोग आज बड़ी बीमारी बनती जा रही है। इसकी चपेट में बुजुर्ग से लेकर जवान भी आ रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही उपचार के लिए स्वास्थ्य उपकरण हैं। इसके कारण मरीजों को उपचार के लिए देहरादून और ऋषिकेश की दौड़ लगानी पड़ रही है। इस वजह से उपचार न मिलने से कई बार मरीज दम भी तोड़ देते हैं। 

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सालों से कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं
जनपद में तीन बड़े अस्पताल मौजूद हैं। इनमें एक मेला अस्पताल है, जो खासकर धर्मनगरी के कारण कुंभ और कांवड़ आदि स्नान पर्वों को देखते हुए बनाया गया है। इसके बराबर में ही जिला अस्पताल मौजूद है। इसके अलावा रुड़की संयुक्त अस्पताल है। तीनों अस्पतालों में सरकार की ओर से मरीजों को सभी स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मेला और रुड़की संयुक्त अस्पताल में सालों से कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं है।
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जिला अस्पताल में एक डॉक्टर तैनात थे। वह भी दिसंबर में रिटायर हो चुके थे। अब संविदा पर जिला अस्पताल में डॉक्टर तैनात है। उनकी भी अधिकांश ड्यूटी जनपद में वीआईपी भ्रमण आने पर वाले लोगों के लिए रहती है।
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इसके अलावा वह अन्य जिला अस्पताल के कार्य भी देखते हैं। इससे अधिकतर उन्हें अस्पताल से बाहर ही रहना पड़ता है। मरीजों का उपचार करने के नाम पर उनके पास स्वास्थ्य उपकरणों में ईसीजी मशीन है, जिससे वह मरीजों को देखकर सरकारी अस्पताल में मौजूद दवाइयों ही दे पाते हैं।

जिला अस्पताल में कोई सुविधा नहीं

हृदय का ऑपरेशन करने के लिए जिला अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। इसके कारण मरीजों को हृदय रोग के लिए दून मेडिकल कॉलेज या फिर ऋषिकेश एम्स में उपचार कराने के लिए जाना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में इलाज करना पड़ रहा है।

मरीजों को चंडीगढ़ तक जाकर ऑपरेशन कराने पड़ रहे
ऐसे में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने से कई बार सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पाने से वे अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। हार्ट का उपचार भी महंगा होने से लोग निजी अस्पतालों में उपचार नहीं करा पा रहे हैं। अटल आयुष्मान में हार्ट के उपचार की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को चंडीगढ़ तक जाकर ऑपरेशन कराने पड़ रहे हैं।

जिन अस्पतालों में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। वहां कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा ताकि हृदय रोगियों को सरकारी अस्पतालों में उपचार मिल सके। 
-डॉ. एसके झा, मुख्य चिकित्साधिकारी हरिद्वार 

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