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यहां बनी है एशिया के सबसे ऊंचे पेड़ की समाधि, आकर्षण का केंद्र है 208 साल का यह महावृक्ष

Wed, 05 Jun 2019 08:08 AM IST
अलका त्यागी करन दयाल, अमर उजाला, देहरादून
करन दयाल, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 05 Jun 2019 08:08 AM IST
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World Environment day 2019 Asia tallest tree mausoleum in uttarakhand 
एशिया के सबसे ऊंचे वृक्ष की समाधि - फोटो : अमर उजाला

विश्व पर्यावरण दिवस पर हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे वृक्ष के बारे में जिसकी समाधि बनाई गई है। उत्तराखंड के जौनसार बावर के पुरोला-त्यूनी मोटर मार्ग पर स्थित 208 वर्ष पुराने महावृक्ष की समाधि लोगों के आकर्षक का केंद्र बनी हुई है।

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वर्ष 1997 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने इस पेड़ को महावृक्ष घोषित किया था। वर्ष 2007 में आई आंधी में 208 वर्ष पुराना यह महावृक्ष धराशायी हो गया था। 60.65 मीटर ऊंचे इस महावृक्ष की समाधि पर रोजाना सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं।
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जौनसार-बावर से सटे बंगाण क्षेत्र के टौंस नदी वन प्रभाग के देवता रेंज-ठडियार की सीमा हनोल से लगी हुई है। हनोल से पांच किलोमीटर दूर देवता रेंज के खूनीगाड़ के पास भासला बीट में एशिया महाद्वीप के सबसे ऊंचे चीड़ महावृक्ष की समाधि है। 

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चार दिन तक चला था महावृक्ष का उपचार

World Environment day 2019 Asia tallest tree mausoleum in uttarakhand 
एशिया के सबसे ऊंचे वृक्ष की समाधि - फोटो : अमर उजाला

इस बहुमूल्य धरोहर के संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से संग्रहालय बनाया गया है, जहां चीड़ महावृक्ष के अवशेष रखे गए हैं। वन विभाग की ओर से हर साल एक से सात जुलाई तक प्रदेशभर में आयोजित वन महोत्सव के अंतर्गत इस क्षेत्र में पौधरोपण किया जाता है।

महावृक्ष की समाधि के पास वन विभाग की ओर से लगाए बोर्ड में लिखा है कि वृक्ष का दो से पांच जनवरी 2007 तक उपचार किया गया था। वृक्ष जड़ से ऊपर लगभग साढ़े तीन फीट तक खोखला हो चुका था।

जिसका भारतीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. एएन शुक्ला के नेतृत्व में चार दिन तक उपचार किया गया था, लेकिन आठ जनवरी 2007 को आई आंधी से पेड़ गिर गया था। समाधि में रखे वृक्ष के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए साल में एक बार मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव किया जाता है। 

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