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उधार लेकर विश्व चैंपियन बना उत्तराखंड का यह सितारा

Sun, 22 Dec 2013 10:36 AM IST
विमल शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
विमल शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 22 Dec 2013 10:36 AM IST
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world champion manoj sarkar

मनोज सरकार (23 वर्ष) वह शख्स हैं जिन्होंने नवंबर 2013 में जर्मनी के डॉटमन में आयोजित पैरा बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के डबल्स में देश के लिए गोल्ड और मिक्स्ड डबल्स में मेडल हासिल किया है।

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मनोज ने अपने हुनर की बदौलत देश-दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन जरूर किया, लेकिन अपने ही राज्य में इस सितारे की चमक धूमिल है।

खेल-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार ने मनोज को इमदाद तो दूर उन्हें बधाई तक देना जरूरी नहीं समझा है। यह हाल तब है, जबकि अन्य राज्यों के ओलंपिक संघ मनोज को शुभकामनाओं के साथ उन्हें अपने यहां आने का ऑफर तक दे चुके हैं।
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हैरत की बात यह है कि जर्मनी जाने के लिए जब मुफलिसी आड़े आने लगी तो मनोज ने खेल निदेशालय को आर्थिक मदद के लिए पत्र भेजा, जिसे नामंजूर कर दिया गया।

आखिर मनोज के पिता ने पड़ोसियों-रिश्तेदारों से साठ हजार रुपए कर्ज लिया और वह जर्मनी में पदक जीत आए। इन दिनों वह उधार चुकाने के लिए बच्चों को कोचिंग दे रहे हैं।

ये रहे मनोज के साथी
मनोज ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान सभी खिलाड़ियों को अलग-अलग ग्रुपों में रखा गया था। वह एफ ग्रुप में थे। हर ग्रुप में लीग मैच के बाद खिलाड़ी आगे बढ़ते गए।

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वह सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे, लेकिन हार गए। डबल्स में मनोज ने उड़ीसा के प्रमोद भगत के साथ गोल्ड मेडल जीता। वहीं, मिक्स्ड डबल्स में गुजरात की पारुल डी. परमार के साथ मनोज कांस्य जीते।

पोलियो से खराब हो गया पांव
घरों में रंगाई-पुताई का काम करने वाले परिवार में जन्मे मनोज ने गरीबी तो देखी ही, बचपन में दायां पांव पोलियो के कारण लकवाग्रस्त हो जाने का दर्द भी झेला। लेकिन अपनी कमजोरी पर मायूस होने के बजाय मनोज ने आगे बढ़ते रहने की ठानी और वर्ल्ड चैंपियन बन गए।


गरीबी ने छुड़वाए दो मौके
आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण स्पेन और टर्की में खेले जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मैचों में मनोज भाग नहीं ले पाए। मनोज ने बताया कि सरकार ने तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब कुछ खेल संगठन उनकी मदद को आगे आ रहे हैं।

कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (केजीसीसीआई) और ऊधमसिंह नगर स्पोर्ट्स क्लब आर्थिक मदद कर रहे हैं।

बेटे की जीत अच्छी लगती है, लेकिन...
मनोज के माता-पिता जमुना देवी और मनेंद्र सरकार ने बताया कि बेटे के मेडल देखकर उन्हें खुशी तो मिलती है। लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से वह बेटे को विदेश नहीं भेज पाते तो बड़ी टीस होती है। उनका कहना है कि सरकार मदद करे तो उनके बेटे का भविष्य बेहतर हो सकेगा।

दूसरे राज्यों से लें सीख
खिलाड़ियों को कैसे आगे बढ़ाया जाता है, राज्य सरकार और खेल अधिकारियों को यह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से सीखना चाहिए।

वहां नेशनल लेवल पर मेडल हासिल करने वाले खिलाड़ियोंको सरकार के स्तर पर मदद तो मिलती ही है, स्कॉलरशिप भी दी जाती है। इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है और वे प्रतियोगिताओं में राज्य का नाम रोशन करने के मकसद से उतरते हैं।

प्रोफाइल
नाम : मनोज सरकार
जन्मतिथि : 12 जनवरी 1990
शिक्षा : बीकॉम, सरदार भगत सिंह डिग्री कॉलेज, रुद्रपुर (एमकॉम में अध्ययनरत)
पता : आदर्श नगर, बंगाली कॉलोनी, रुद्रपुर ऊधमसिंह नगर

खिलाड़ियों की मदद केलिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। मनोज की उपलब्धि वाकई काबिले तारीफ है। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्हें पूरी मदद की जाएगी।
- दिनेश अग्रवाल, खेल मंत्री

प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं, लेकिन संसाधन और मदद के अभाव में वे दम तोड़ रही हैं। सरकार को खिलाड़ियों की आर्थिक मदद के लिए तैयार रहना चाहिए।
- विजय आहूजा, अध्यक्ष, ऊधमसिंह नगर स्पोर्ट्स क्लब

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