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ट्रैजिडि ऑफ पलाशबाडी में दिखी परिश्रमी मजदूरों की विवशता
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दीपनगर रोड स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित 21वें भारत रंग महोत्वस अवसर पर 'ट्रैजिक ऑफ पलाशबाड़ी' नाट?
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित भारत रंग महोत्सव में सोमवार को बंगाली नाटक ट्रैजिडि ऑफ पलाशबाडी का मंचन किया गया। नाटक में कपड़ों के कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की विवशता और मजबूरी को दर्शाया गया है। साथ ही मालिकों के धन कमाने के अमावनीय दुष्टिकोण को भी दर्शाया गया है।
दीपनगर स्थित संस्कृति निदेशालय के नए सभागार में नाटक का मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत कपड़ों के कारखाने के मालिक के साथ होती है, जो मजदूरों को हल हाल में काम के लिए मजबूर कर रहा है। अगले दृश्य में मशीन की तरह काम करने की उनकी दिनचर्या दर्शाई जाती है। जिसमें अचानक वह भवन जिसमें मजदूर काम करते हैं, वह ढह जाता है। नाटक में केंद्रीय चरित्र तारावन जागती है और वह अपने चारों और भय का माहौल पाती है। वह मलबे में फंसी हुई और कुछ ही क्षणों में मरने वाली है। इसी दौरान उसे अपने अधूरे जीवन व अधूरे सपने दिखाई देने लगते हैं। जिसमें श्रमिकों की मजबूरी और विवशता को दर्शाया जाता है। साथ ही इसमें मालिकों के धन कमाने की लालसा को दर्शाया गया है।
नाटक के निर्देशक आजाद अबुल कलाम हैं। नाटक में परवीन सुल्ताना ने तरावन, मोहम्मद रफीक, प्रोद्दुत कुमार, रिफत सुदीप, शहरयार राना ने भूमिका निभाई। इस दौरान कला मंच के संस्थापक ज्योतिष घिल्डियाल और महाबीर रवांल्टा की ओर से नाटक के निर्देशक आजाद अबुल कलाम को सम्मानित किया गया।
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दीपनगर स्थित संस्कृति निदेशालय के नए सभागार में नाटक का मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत कपड़ों के कारखाने के मालिक के साथ होती है, जो मजदूरों को हल हाल में काम के लिए मजबूर कर रहा है। अगले दृश्य में मशीन की तरह काम करने की उनकी दिनचर्या दर्शाई जाती है। जिसमें अचानक वह भवन जिसमें मजदूर काम करते हैं, वह ढह जाता है। नाटक में केंद्रीय चरित्र तारावन जागती है और वह अपने चारों और भय का माहौल पाती है। वह मलबे में फंसी हुई और कुछ ही क्षणों में मरने वाली है। इसी दौरान उसे अपने अधूरे जीवन व अधूरे सपने दिखाई देने लगते हैं। जिसमें श्रमिकों की मजबूरी और विवशता को दर्शाया जाता है। साथ ही इसमें मालिकों के धन कमाने की लालसा को दर्शाया गया है।
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नाटक के निर्देशक आजाद अबुल कलाम हैं। नाटक में परवीन सुल्ताना ने तरावन, मोहम्मद रफीक, प्रोद्दुत कुमार, रिफत सुदीप, शहरयार राना ने भूमिका निभाई। इस दौरान कला मंच के संस्थापक ज्योतिष घिल्डियाल और महाबीर रवांल्टा की ओर से नाटक के निर्देशक आजाद अबुल कलाम को सम्मानित किया गया।
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